वालोड (तापी)। एक तरफ राज्य सरकार ‘नंदघर’ और स्मार्ट आंगनबाड़ियों के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर तापी जिले के वालोड तालुका स्थित गोपालनगर में प्रशासन की घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। साल 2009 में स्वीकृत हुई ‘वालोड-10’ आंगनबाड़ी 17 साल बीत जाने के बाद भी एक पक्के भवन को तरस रही है।
वर्तमान में करीब 27 मासूम बच्चे किसी सुविधा संपन्न भवन में नहीं, बल्कि पशु आहार के गोदाम और तबेले के परिसर में बैठने को मजबूर हैं। जिस स्थान पर बच्चों की कक्षा लगती है, वहां पशुओं को नहलाया जाता है, जिससे हर समय कीचड़ और असहनीय दुर्गंध फैली रहती है। स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अपने घर से 2 किलोमीटर दूर नाश्ता बनाकर लाना पड़ता है।
वर्ष 2015 में पंचायत ने ब्लॉक 148/अ के तहत भूमि का प्रस्ताव भेजा था और ग्रांट भी मंजूर हुई थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण बजट का उपयोग नहीं हुआ और राशि वापस लौट गई।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जिस सरकारी जमीन पर पहले आंगनबाड़ी के लिए भूमिपूजन किया गया था, उसे बाद में कन्या छात्रावास के लिए तुरंत आवंटित कर दिया गया। लेकिन नौनिहालों की नींव मजबूत करने वाली आंगनबाड़ी 17 वर्षों बाद भी जमीन के टुकड़े के लिए तरस रही है, जो स्थानीय जन प्रतिनिधियों और प्रशासन की इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करती है।
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