दिल्ली में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए दिल्ली सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार राजधानी में करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से 27 नए स्थायी (परमानेंट) सरकारी स्कूल कैंपस बनाने की योजना पर काम कर रही है। इन स्कूलों का निर्माण दिल्ली सरकार की खाली पड़ी जमीनों पर किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट को 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिले हैं। आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के कार्यकाल में स्कूलों में नए क्लासरूम बनाए गए, स्मार्ट सुविधाएं विकसित की गईं और कई स्कूल परिसरों का आधुनिकीकरण किया गया था। अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार भी नए स्कूल कैंपस बनाकर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अपनी प्राथमिकता दिखा रही है।
शिक्षा मंत्री ने बताईं आधुनिक कैंपस की खूबियां
सरकार का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है। नए स्कूलों में ऐसे संसाधन विकसित किए जाएंगे, जो विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि नए स्कूल कैंपस आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। इनमें मॉडर्न क्लासरूम, अत्याधुनिक साइंस लैब, समृद्ध लाइब्रेरी, मल्टीपर्पज हॉल और पर्यावरण अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उनका कहना है कि इन आधुनिक संसाधनों के जरिए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर सीखने का माहौल मिलेगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और भविष्य के अनुरूप सीखने का वातावरण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नए भवन नहीं बना रही, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करना चाहती है जो आने वाले समय की जरूरतों के अनुरूप हो। स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए आशीष सूद ने कहा, “यह जिम्मेदारी हमारी और आपकी है कि हम ऐसे स्कूल बनाएं, जहां आप अपनी अगली पीढ़ी को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की इच्छा रखें।” उन्होंने कहा कि मजबूत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सरकारी शिक्षा में लोगों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
छात्रों को मिलेगा आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण लर्निंग एनवायरनमेंट
इन स्कूलों में छात्रों को सिर्फ बेहतर शिक्षा ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल भी मिलेगा जो उनकी समग्र सीखने की क्षमता को बढ़ावा देगा। सरकार का उद्देश्य हर बच्चे को क्वालिटी लर्निंग एनवायरनमेंट उपलब्ध कराना है, ताकि आधुनिक सुविधाओं के बीच बेहतर शिक्षण सुनिश्चित किया जा सके। इन स्कूलों का निर्माण पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) तरीके से किया जाएगा। परिसर में सोलर पावर, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी टिकाऊ एवं आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन उपायों का उद्देश्य ऊर्जा और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ छात्रों को सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा से भी जोड़ना है।
18 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी स्कूल परियोजना को 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन स्कूलों का डिजाइन शिक्षा निदेशालय (DoE) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इनके विस्तार की भी पर्याप्त गुंजाइश रहे। सरकार का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं और मानक आधारित डिजाइन के साथ तैयार होने वाले ये स्कूल राजधानी के शिक्षा ढांचे को नई दिशा देंगे। यदि परियोजना तय समयसीमा के भीतर पूरी होती है, तो यह दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है और छात्रों को विश्वस्तरीय शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम होगी।
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