करनाल, 6 अगस्त। उपायुक्त डॉ आनंद कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जिला स्तरीय निरीक्षण समिति द्वारा आज जिले में संचालित विभिन्न संस्थाओं का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य संस्थाओं में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम एवं नियमों के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का मूल्यांकन करना था।
निरीक्षण के दौरान ऑब्जर्वेशन होम फॉर गर्ल्स तथा श्रद्धानंद बाल गृह का निरीक्षण अतिरिक्त उपायुक्त राहुल रईया की अध्यक्षता में किया गया, जबकि प्लेस ऑफ सेफ्टी, मधुबन का निरीक्षण एसडीएम देवेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
समिति ने संस्थाओं में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी सुविधाओं का गहनता से निरीक्षण किया। इस दौरान बच्चों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी भी ली गई। निरीक्षण के दौरान कुछ बुनियादी कमियां सामने आईं, जिनके संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं संस्थाओं के प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
अतिरिक्त उपायुक्त राहुल रईया ने ऑब्जर्वेशन होम फॉर गर्ल्स तथा श्रद्धानंद बाल गृह में साफ-सफाई, रख-रखाव एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं में और सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के रहने का वातावरण स्वच्छ, सुरक्षित एवं अनुकूल होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार नवजात शिशुओं को असुरक्षित स्थानों, जैसे झाडिय़ों अथवा कूड़े के ढेर में छोड़ दिए जाने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों को रोकने तथा नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संबंधित संस्था के मुख्य द्वार पर पालना (क्रैडल) स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर नवजात शिशु को सुरक्षित रूप से वहां छोड़ सके और उसके जीवन की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
वहीं, प्लेस ऑफ सेफ्टी मधुबन के निरीक्षण के दौरान वहां निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों के रहने का मामला सामने आया। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक सप्ताह में एक बार संस्थान का दौरा करते हैं। इस पर एसडीएम करनाल ने निर्देश दिए कि बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी एवं नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए अब चिकित्सकों का सप्ताह में दो बार दौरा कराया जाए।
इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास, सुरक्षा एवं बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थाओं में सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य उमेश चांदना, बाल कल्याण समिति की सदस्य सुमन, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. नवनीत तथा जिला बाल कल्याण अधिकारी मंजू सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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