कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के तीन शहरों ने देश की स्वच्छ वायु रैंकिंग में टॉप-4 में हाल ही में जगह बनाई है। लेकिन ग्वालियर की स्थिति इन शहरों के मुकाबले काफी पीछे नजर आ रही है। इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे स्थान पर है, जबकि ग्वालियर 30वें पायदान पर रहा। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के बजट और प्रदूषण नियंत्रण के दावों के बावजूद ग्वालियर की हवा अब तक साफ क्यों नहीं हो सकी?
शहर में उड़ती धूल, बड़े निर्माण कार्य और बढ़ते प्रदूषण के बीच लोगों के स्वास्थ्य पर भी चिंता बढ़ रही है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में मध्य प्रदेश के इंदौर, जबलपुर और भोपाल ने देश के टॉप-4 शहरों में जगह बनाई है। इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे स्थान पर रहा, जबकि ग्वालियर 30वें नंबर पर है।चार प्रमुख शहरों की तुलना करें तो इंदौर ने 197, जबलपुर ने 195 और भोपाल ने 192 अंक हासिल किए। वहीं ग्वालियर का स्कोर 157 अंक रहा। हालांकि, यह सर्वेक्षण सिर्फ हवा में प्रदूषण की मात्रा नहीं, बल्कि प्रदूषण रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके प्रभाव का भी आकलन करता है। इसके बावजूद ग्वालियर की जमीनी तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है।
सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण कार्यों से निकलने वाले डस्ट पार्टिकल्स और ट्रैफिक का दबाव शहर की हवा को प्रभावित कर रहे हैं। प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका बढ़ सकती है।
शहर के लोगों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए करोड़ों रुपये के फंड उपलब्ध होने के बावजूद उनका प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो रहा। यदि योजनाओं और बजट का सही तरीके से उपयोग किया जाता, तो ग्वालियर की हवा की स्थिति में अब तक बेहतर सुधार दिखाई देना चाहिए था।
वहीं, ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने शहर की भौगोलिक और निर्माण संबंधी परिस्थितियों को भी प्रदूषण की वजह बताया है। उनका कहना है कि ग्वालियर की मिट्टी का नेचर अपेक्षाकृत ज्यादा ड्राई है,जिसके कारण छोटे-छोटे धूल कण हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं,कलेक्टर रुचिका चौहान के मुताबिक,ग्वालियर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास, एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट और शहर में चल रहे अन्य बड़े निर्माण कार्य भी वर्तमान में हवा की गुणवत्ता प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम के साथ मिलकर इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
बहरहाल प्रशासन का लक्ष्य है कि धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाए,ग्वालियर की हवा में सुधार आए और स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की अगली रैंकिंग में शहर की स्थिति मजबूत हो। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि योजनाओं और दावों का असर ग्वालियर के आम लोगों को साफ हवा के रूप में कब दिखाई देगा?
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