शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश में जनगणना के तहत चल रहे मकानों की गिनती का पहला चरण पूरा हो चुका है। इस प्रक्रिया के पूरे होते ही जो आंकड़े सामने आए हैं उसने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रदेश में कितने घरों के दरवाजों पर ताले लटके मिले हैं? सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 38827 घरों में ताले लगे पाए गए हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को सूना छोड़कर कहां चले गए हैं? जब जनगणना टीम ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की तो इसके पीछे पलायन की एक बेहद गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
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बंद मकानों में कौन सा शहर है सबसे आगे?
अगर आप सोच रहे हैं कि पलायन सिर्फ ग्रामीण या पिछड़े इलाकों में हो रहा है तो आप गलत हैं। बंद घरों की इस लिस्ट में प्रदेश के बड़े और विकसित शहर सबसे ऊपर हैं। संस्कारधानी जबलपुर इस लिस्ट में सबसे ऊपर है जहां सबसे ज्यादा 5882 घरों में ताले लटके मिले हैं। जबकि बुंदेलखंड के छतरपुर में 5070 के आंकड़े के साथ दूसरे पायदान पर है।
महानगरों का क्या है हाल?
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 4,548 और प्रशासनिक राजधानी भोपाल में 3,844 मकानों पर ताले लटके मिले। वहीं ग्वालियर में यह आंकड़ा 2,288 और रीवा में 1,265 रहा।
गुना और कटनी में ताले क्यों नहीं मिले?
जहां एक तरफ बड़े शहरों में हजारों घर बंद मिले तो वहीं प्रदेश के दो जिलों ने सबको हैरान कर दिया है। जनगणना टीम को गुना के एक भी घरों में ताला नहीं मिला। यहां शत प्रतिशत घरों में लोग रहते पाए गए।
वहीं सर्वे के दौरान कटनी में भी हैरान करने वाला आंकड़ा मिला। जहां सिर्फ एक घर में ताला लटका मिला। कटनी जिले में बी स्थिति लगभग वैसी ही रही, जहां पूरे जिले में महज एक मकान ऐसा मिला जिसके मुख्य दरवाजे पर ताला था।
फरवरी 2027 में शुरू होगा दूसरा चरण
मकानों और परिसंपत्तियों की गिनती का यह पहला चरण संपन्न हो चुका है, जिसने प्रदेश में पलायन के स्तर को लेकर एक नया डेटा सामने रखा है। विभाग के मुताबिक इस जनगणना प्रक्रिया का दूसरा चरण अब फरवरी 2027 में शुरू किया जाएगा। जिसमें जनसंख्या और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां जुटाई जाएंगी।
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अब आगे क्या होगा?
मकानों और संपत्तियों की गिनती का यह पहला चरण तो पूरा हो गया है, जिसने राज्य में पलायन के स्तर को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस जनगणना प्रक्रिया का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। देखना होगा कि दूसरे चरण में जब व्यक्तिगत और जनसंख्या के आंकड़े जुटाए जाएंगे तो मध्य प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की क्या तस्वीर उभरकर सामने आती है।

