चंडीगढ़। हरियाणा के चर्चित 661 करोड़ रुपये के आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक चली इस कार्रवाई में कई अहम दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।

IAS और IFS अधिकारियों के आवास पर रेड

सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शाइन और प्रदीप कुमार के अलावा आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव के आवासों पर छापेमारी की। इसके साथ ही नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक से जुड़े ठिकानों की भी तलाशी ली गई।

जांच एजेंसी ने कार्रवाई के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। इनकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी।

661 करोड़ तक पहुंचा घोटाले का आंकड़ा

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि हरियाणा के आठ सरकारी विभागों से जुड़े इस बैंक घोटाले में शुरुआत में 560 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का पता चला था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह राशि बढ़कर 661 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

एजेंसी को संदेह है कि सरकारी धन को कथित तौर पर फर्जी खातों और संदिग्ध लेन-देन के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इन लेन-देन से संबंधित अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को क्या लाभ मिला।

रिश्तेदार के नाम खरीदी गई कोठी भी जांच के घेरे में

सूत्रों के अनुसार पंचकूला में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा हाल ही में खरीदी गई एक कनाल की कोठी भी जांच के दायरे में है। बताया जा रहा है कि यह संपत्ति सीधे अधिकारी के नाम पर न होकर एक रिश्तेदार के नाम दर्ज कराई गई थी। सीबीआई को इस संपत्ति से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज भी मिले हैं।

कंपनी खाते से निजी खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा

सीबीआई की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कथित लेन-देन से प्राप्त रकम पहले विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के खाते में जमा हुई और बाद में उसे कंपनी निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर किया गया।

पूरक चार्जशीट की तैयारी

सीबीआई इस मामले में पहले ही विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जिन अन्य लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है, जिसमें कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि किसी भी अधिकारी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही तय होगी।

सरकारी विभाग भी जांच के दायरे में

चार्जशीट में हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। सीबीआई यह जांच कर रही है कि सरकारी धन को किस प्रक्रिया के तहत बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया और कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही।