अनिल शर्मा, बराड़ा । साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अम्बाला साइबर थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ₹7.95 लाख की ऑनलाइन ठगी के मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के इटावा से दो और शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या चार हो गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जावेद वारसी और आफताब के रूप में हुई है, जो इटावा (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 हजार रुपये नकद और ठगी की रकम से खरीदे गए दो महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
फर्जी बैंक कर्मचारी बनकर रची ठगी की साजिश
जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को बैंक कर्मचारी बताकर लोगों को झांसे में लेते थे। ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं सक्रिय कराने और तकनीकी सहायता देने के नाम पर वे पीड़ितों के मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड करवाते थे। फाइल इंस्टॉल होते ही साइबर ठगों को मोबाइल और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच मिल जाती थी, जिसके बाद खातों से रकम निकाल ली जाती थी।
ऐसे हुई ₹7.95 लाख की ठगी
मामले के शिकायतकर्ता जसविंदर सिंह, निवासी गांव कसेरला खुर्द (बराड़ा), ने 21 जनवरी 2026 को साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 14 से 17 जनवरी के बीच अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को पीएनबी बैंक का कर्मचारी बताकर संपर्क किया और ऑनलाइन बैंकिंग सिखाने के बहाने उनके मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड करवाई। इसके बाद उनके खाते से ₹7.95 लाख की राशि निकाल ली गई।
तकनीकी जांच से पुलिस पहुंची आरोपियों तक
साइबर थाना के उप-निरीक्षक संदीप कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। इसी कड़ी में 24 जून 2026 को दोनों आरोपियों को इटावा से गिरफ्तार किया गया।
खातों का इस्तेमाल कर रकम पहुंचाते थे गिरोह तक
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। साइबर ठगी की रकम पहले इन खातों में मंगवाई जाती थी। खाताधारकों को कुछ हिस्सा देने के बाद बाकी रकम मुख्य साइबर अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस की सलाह
अम्बाला पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK फाइल, स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें। बैंक कभी भी फोन पर गोपनीय जानकारी, ओटीपी या ऐप इंस्टॉल करने के लिए नहीं कहता।
साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर रकम को सुरक्षित किया जा सके।

