अमृतसर. खडूर साहिब के सांसद और ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह के साथ डिब्रूगढ़ जेल में बंद गुरिंदर सिंह औजला ने भी पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दोबारा लगाए गए एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) को चुनौती दी है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि उनका अमृतपाल सिंह और उनके संगठन से कोई संबंध नहीं है.
गुरिंदर सिंह औजला ने तर्क दिया है कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के समय जेल से जो हत्या की निंदा करते हुए एक चिट्ठी लिखी गई थी, उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे. वह हस्ताक्षर नकली थे. अब हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है, और मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी.

सरकार ने अब अमृतपाल सिंह और उसके साथियों पर लगाए गए एनएसए की अवधि बढ़ा दी है. इसके बाद, अमृतपाल सिंह और उसके सभी साथियों ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक-एक करके एनएसए की अवधि बढ़ाने को चुनौती दी है. सभी अपनी-अपनी याचिकाओं में अलग-अलग दलीलें पेश कर रहे हैं और यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके खिलाफ एनएसए गलत तरीके से लगाया गया है.
इससे पहले, जब अमृतपाल सिंह पर दोबारा एनएसए लगाया गया, तब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से पूरा रिकॉर्ड मांगा था. अब सरकार को अदालत को यह बताना होगा कि एनएसए की अवधि कैसे बढ़ाई गई.
गुरिंदर पाल सिंह औजला अमृतपाल सिंह का सोशल मीडिया हैंडलर था, और उसने ही संगठन से संबंधित सभी पोस्ट साझा की थीं. इससे पहले, अमृतपाल के साथी दलजीत सिंह कलसी और कुलवंत सिंह राऊके ने भी एनएसए को चुनौती दी थी. दोनों चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. दलजीत सिंह कलसी डेरा बाबा नानक से विधानसभा उपचुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि कुलवंत सिंह राऊके बनाला से चुनाव लड़ना चाहते हैं.
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