Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मेन बेंच की नई बिल्डिंग की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। करीब 21 मीटर ऊंचे सेंट्रल डोम की सुरक्षा से जुड़े मामले का कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। आईआईटी बॉम्बे की रिपोर्ट में डोम के कभी भी ढहने की आशंका जताई गई है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है। साथ ही सुरक्षा के तत्काल उपाय करने के निर्देश दिए हैं।

2023 से सामने आ रहीं गंभीर खामियां

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भवन को सुपुर्द किए जाने के कुछ ही वर्षों में कई गंभीर संरचनात्मक खामियां सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2023 से अब तक भवन के अलग-अलग हिस्सों में छत, फॉल्स सीलिंग और प्लास्टर गिरने की घटनाएं हुई हैं। सेंट्रल डोम का एक हिस्सा भी गिर चुका है। भवन में सीपेज और पानी के रिसाव के साथ खराब सैनिटरी पाइप, ड्रेनेज की खामियां, आग से सुरक्षा संबंधी कमियां और संरचनात्मक दरारें भी सामने आई हैं।

रेट्रोफिटिंग और मरम्मत पर 57.65 करोड़ का अनुमान

आईआईटी जोधपुर की जांच में स्टील रीबार में भारी जंग, कंक्रीट में दरार और वॉटरप्रूफिंग से जुड़ी खामियां मिली थीं। बाद में किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में भी निर्माण की गुणवत्ता और पानी में अधिक क्लोराइड की समस्या सामने आई। भवन की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग के लिए करीब 57.65 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया गया था। आईआईटी बॉम्बे की हालिया जांच में भी कई संरचनात्मक हिस्सों में सक्रिय जंग पाई गई। निरीक्षित क्षेत्र के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को कंक्रीट स्पॉलिंग के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है।

डोम क्षेत्र में 24 घंटे निगरानी के निर्देश

हाईकोर्ट ने सेंट्रल डोम क्षेत्र को बैरिकेड करने और सीपेज की समस्या तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही डोम और संबंधित संरचनात्मक हिस्सों की 24 घंटे स्ट्रक्चरल मॉनिटरिंग करने को कहा गया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 24 अगस्त तक विस्तृत शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। शपथपत्र में जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के साथ-साथ अब तक हुए खर्च और स्थायी समाधान के लिए तैयार की गई समयबद्ध कार्ययोजना का विवरण देना होगा।

मुख्य सचिव समेत कई अधिकारी होंगे पेश

24 अगस्त को मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, आरएसआरडीसी के एमडी और डीजीपी समेत संबंधित विशेषज्ञों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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