पटना। बिहार के नर्सिंग शिक्षा क्षेत्र में बड़ा संकट सामने आया है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने राज्य के 40 नर्सिंग कॉलेजों की राष्ट्रीय मान्यता रद्द कर दी है। इन संस्थानों में संचालित करीब 45 कोर्स में पढ़ रहे हजारों छात्रों के भविष्य पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। मान्यता रद्द होने के बाद प्रभावित कॉलेजों से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए बिहार के बाहर नौकरी और दूसरे राज्यों में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कराने में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। काउंसिल की जांच में कई संस्थानों में गंभीर कमियां सामने आईं। कुछ निजी नर्सिंग कॉलेज महज दो कमरों में संचालित होते मिले। कई संस्थानों में शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और जरूरी दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठे। इसके अलावा क्लिनिकल लैब, पर्याप्त शिक्षक और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी जांच में सामने आई।

छात्रों को किन क्षेत्रों में होगा नुकसान?

मान्यता रद्द होने का सबसे बड़ा असर छात्रों के करियर पर पड़ सकता है। प्रभावित संस्थानों से पास होने वाले अभ्यर्थियों के लिए दूसरे राज्यों के नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना मुश्किल होगा। इससे वे दूसरे राज्यों में निकलने वाली नर्सिंग की सरकारी और निजी नौकरियों से बाहर हो सकते हैं। केंद्र सरकार के अस्पतालों, एम्स और रेलवे जैसी संस्थाओं में नर्सिंग ऑफिसर की भर्तियों में भी परेशानी आ सकती है। इसके अलावा विदेश में नर्सिंग की नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के सामने भी अड़चनें पैदा हो सकती हैं।

सरकारी संस्थान भी कार्रवाई की जद में

इस कार्रवाई से केवल निजी कॉलेज ही प्रभावित नहीं हुए हैं। पीएमसीएच पटना का जीएनएम नर्सिंग इंस्टीट्यूट, पावापुरी स्थित भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का बीएससी नर्सिंग कॉलेज और भागलपुर मेडिकल कॉलेज का जीएनएम स्कूल भी सूची में शामिल हैं। रेलवे अस्पताल खगौल और कुछ सदर अस्पतालों के नर्सिंग स्कूल भी कार्रवाई की चपेट में आए हैं।

बिहार नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. रेखा झा के मुताबिक, जिन संस्थानों की मान्यता रद्द हुई है, उन्हें कमियां दूर कर दोबारा निरीक्षण के लिए आवेदन करना होगा। जांच में मानक पूरे पाए जाने के बाद ही मान्यता बहाल की जा सकेगी।