कुंदन कुमार/पटना। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। एक ओर जहां राज्य सरकार पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच करवा रही है वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार ने जिले के पुलिस कप्तान (SP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि उन्हें मामले में चुप रहने के लिए धमकी दी जा रही है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​जांच की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल

​एनकाउंटर के बाद से ही यह मामला सुर्खियों में है। अब जब न्यायिक जांच प्रक्रियाधीन है तो पुलिस कप्तान का नाम सामने आना जांच की निष्पक्षता को संदिग्ध बना रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या प्रशासन जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है?

​राजद का सरकार पर हमला

​इस संवेदनशील मामले पर बिहार की राजनीति भी उबाल पर है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा अगर जिले के कप्तान द्वारा पीड़ित परिवार को धमकी दी गई है तो यह गंभीर जांच का विषय है। यदि आरोप सत्य हैं तो यह पीड़ित परिवार के साथ सरासर अन्याय है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
​एजाज अहमद ने आगे मांग की कि पुलिस कप्तान को खुद सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी हरकतें न केवल जांच को प्रभावित करती हैं, बल्कि सरकार की साख पर भी बट्टा लगाती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह तत्काल हस्तक्षेप करे ताकि जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष बनी रहे।
​फिलहाल, आम जनता से लेकर विपक्ष तक की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस आरोप पर क्या रुख अपनाती है। क्या पुलिस कप्तान पर लगे आरोपों की अलग से जांच होगी, या फिर न्यायिक जांच के दायरे में ही इसे शामिल किया जाएगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल पीड़ित परिवार दहशत में है और न्याय की गुहार लगा रहा है।