पटना। बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य का सियासी पारा बढ़ा दिया है। होली के खुमार के बीच जेडीयू और बीजेपी की दो-दो सीटें सुरक्षित दिख रही हैं, लेकिन 5वीं सीट ने एनडीए और महागठबंधन के बीच शह-मात का खेल शुरू कर दिया है।

​एनडीए की किलेबंदी और कुशवाहा की चुनौती

​यह सीट वर्तमान में उपेंद्र कुशवाहा के पास है। चर्चा है कि भाजपा ने उन्हें सीट बचाने के लिए पार्टी विलय का प्रस्ताव दिया है, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इस बीच, एनडीए ने ‘क्रॉस वोटिंग’ रोकने के लिए अपने 202 विधायकों से लिखित शपथ पत्र और प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर ले लिए हैं। दूसरी तरफ, चिराग पासवान 19 विधायकों के साथ निश्चिंत हैं, जबकि जीतन राम मांझी की दावेदारी ने तनाव बढ़ा दिया है।

​लालू-तेजस्वी का मास्टर प्लान

​आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और तेजस्वी यादव ने भी उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है। राजद को अपनी जीत के लिए अन्य दलों (BSP और AIMIM) के समर्थन की जरूरत होगी। हार्स ट्रेडिंग के डर से राजद ने भी अपने विधायकों से लिखित समर्थन लेकर उन्हें एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है।

​इन चेहरों पर टिकी हैं नजरें

​निशांत कुमार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत के राजनीति में प्रवेश की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि संजय झा और ललन सिंह ने उन्हें राज्यसभा के लिए मना लिया है।

​पवन सिंह: भोजपुरी स्टार और भाजपा के फायरब्रांड प्रचारक पवन सिंह को राज्यसभा भेजकर भाजपा राजपूत और युवा वोट बैंक साध सकती है।

​रामनाथ ठाकुर: कर्पूरी ठाकुर के पुत्र और वर्तमान मंत्री होने के नाते इनका पलड़ा भारी है।

​मनीष वर्मा: नीतीश कुमार के करीबी पूर्व IAS मनीष वर्मा भी जेडीयू की रेस में आगे हैं।

​नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है, जिससे पहले बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने की संभावना है।