Rajasthan News: राजस्थान में नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा चुनाव टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की खबरों के बीच पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने भी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है, ताकि यदि सरकार चुनाव स्थगित करने की मांग लेकर आती है, तो अदालत कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष भी जरूर सुने।

बहानों से चुनाव नहीं टाले जा सकते- संयम लोढ़ा

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव पहले ही काफी विलंब से हो रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि परिसीमन, पुनर्गठन या ओबीसी आयोग की रिपोर्ट जैसे तकनीकी बहाने बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। लोढ़ा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट को सरकार को यह स्पष्ट निर्देश देना चाहिए कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर ही मतदान संपन्न कराए।

एएजी ने याचिका की खबरों को नकारा

एक ओर जहां राजनीतिक गलियारों में याचिका की चर्चा है, वहीं राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) शिव मंगल शर्मा ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से फिलहाल चुनाव आगे बढ़वाने के लिए ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की गई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के मुताबिक, 113 निकायों के वार्ड परिसीमन रद्द होने के बाद सरकार को नई प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय चाहिए, जिससे चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।

आपको बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट ने बीते 14 नवंबर को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था। साथ ही 31 दिसंबर तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा तय की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछली सुनवाई में इसी समय सीमा को बरकरार रखा था।

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