Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और मासूमों की सुरक्षा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 को जस्टिस अशोक कुमार जैन और जस्टिस महेंद्र गोयल की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार बजट की कमी का हवाला देकर बच्चों के शिक्षा और जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकती। झालावाड़ हादसे के बाद शुरू हुए इस मामले में कोर्ट ने सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जाहिर की है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमित्र एस.एस. होरा ने महत्वपूर्ण दलील देते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार एक संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जर्जर भवनों के कारण बच्चों के जीवन को खतरे में डालना सीधे तौर पर मौलिक अधिकारों का हनन है। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) की ओर से एडवोकेट वागीश सिंह ने भी सरकार द्वारा अब तक पेश किए गए सुधार प्लान को नाकाफी बताया, जिससे खंडपीठ पूरी तरह असंतुष्ट दिखी।
अदालत ने अब सीधे मुख्य सचिव (CS) को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले एक नया शपथ पत्र और स्पष्ट रोडमैप पेश किया जाए। इस रिपोर्ट में सरकार को यह विस्तार से बताना होगा कि प्रदेश के सभी जर्जर स्कूल भवनों का कायाकल्प कब तक और किस योजना के तहत किया जाएगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने सरकारी आंकड़ों पर भरोसा करने के बजाय सभी स्कूलों का एक स्वतंत्र पक्ष से इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट करवाने और इसके लिए एक विशेष कमेटी गठित करने के संकेत भी दिए हैं।
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