प्रदीप मालवीय, उज्जैन। इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक उज्जैन में आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से किन्नर समाज के संत शामिल हुए। बैठक के दूसरे दिन संतभोज और पंडित भोज का आयोजन किया गया, साथ ही अखाड़े के विस्तार, संतों की जिम्मेदारियों और आगामी कुंभ पर्वों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मीडिया से चर्चा में आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2019 में हुए अनुबंध के अनुसार किन्नर अखाड़ा आगामी कुंभ और सिंहस्थ में जूना अखाड़ा के साथ ही शाही स्नान करेगा। उन्होंने कहा कि जहां जूना अखाड़ा स्नान करेगा, वहीं किन्नर अखाड़ा भी उनके साथ शामिल रहेगा।
बाबा महाकालेश्वर मंदिर से किन्नर समाज का संबंध
उन्होंने उज्जैन और बाबा महाकालेश्वर मंदिर से किन्नर समाज के गहरे संबंध का भी उल्लेख किया। कहा कि किन्नर अखाड़े को सनातन धर्म में जो पहचान और सम्मान मिला है, उसमें बाबा महाकाल की कृपा और उज्जैन की जनता के स्नेह का विशेष योगदान है। वर्ष 2016 में सिंहस्थ के दौरान जब किन्नर अखाड़ा उज्जैन आया था, तब शहरवासियों ने उन्हें अपनाया और सम्मान दिया, जिसके कारण किन्नर समाज इस शहर को अपना घर मानता है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में अन्य अखाड़ों की तरह किन्नर अखाड़े के लिए भी स्थायी मंदिर और आश्रम की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए सरकार और प्रशासन से भी मांग की जाएगी तथा मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास किया जाएगा।
हाल ही में दो नए महामंडलेश्वर और कई श्रीमहंत बनाए गए
त्रिपाठी ने बताया कि अखाड़े के विस्तार के लिए लगातार नए संतों को जिम्मेदारियां दी जा रही है। हाल ही में दो नए महामंडलेश्वर और कई श्रीमहंत बनाए गए है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, कन्याकुमारी, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, बंगाल, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से किन्नर समाज के लोग अखाड़े से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े से भारत के अलावा थाईलैंड, श्रीलंका और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को सहित कई देशों के किन्नर भी जुड़े हुए हैं।
संतों को जिम्मेदारियां सौंपने को लेकर चर्चा
अखाड़ा केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा के कार्य भी करता है, जिनमें बेटियों की शादी कराना, अनाथ बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंदों की मदद शामिल है। बैठक में आगामी कुंभ और सिंहस्थ पर्व को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और विभिन्न संतों को जिम्मेदारियां सौंपने को लेकर भी चर्चा की गई।
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