Raipur News : शिवम मिश्रा/सुरेंद्र जैन, रायपुर. छत्तीसगढ़ औद्योगिक परिवहन कल्याण संघ अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गया है. राज्य के बाहर की ट्रांजिट पास वाली गाड़ियां और राज्य के भीतर की गाड़ियों को रोक दिया गया है. जिसके चलते औद्योगिक क्षेत्र धरसींवा, सिलतरा का काम काज पूरी तरह ठप्प पड़ गया है. परिवहन के रुकने से उद्योगों में काम रोकने की नौबत आ गई है.


सिलतरा के उद्योगपति दबी जुबान से कह रहे हैं कि इस तरह का दबाव बनाकर ट्रांसपोर्ट संघ को हम पर थोपा जा रहा है. ताकि कुछ लोगो को इसका पूरा लाभ पहुंच सके. छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन मनुफ़ैक्चरेर्स एसोसिएशन (CGSIMA) के पदाधिकारी भी कुछ कहने से बचते हुए नजर आ रहे है. लेकिन ये बात साफ़ है की ऐसे प्रदर्शनों से उद्योगों के काम काज बंद होते जा रहे है.
संघ की आड़ में निजी हित का प्रयास का आरोप
सिलतरा के उद्योगपती दबी जुबान से कह रहे हैं कि परिवहन कल्याण संघ की आड़ में कुछ चुनिंदा ट्रांसपोर्टर्स अपने निजी हित को साधने का प्रयास कर रहे है. इस इलाके के चुनिंदा ट्रांसपोर्टर्स राजनैतिक संरक्षण प्राप्त कर उद्योगपतियों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे है. इस औद्योगिक क्षेत्र में सालो से चले आ रहे व्यवस्था को ठप्प कर नई व्यवस्था शुरू करने की मांग की जा रही है. जिससे भविष्य में इनके निजी हितों को भरपूर लाभ मिल सके और हम कारोबारियों पर दबाव बनाया जा सके.
दरअसल, छत्तीसगढ़ औद्योगिक परिवहन कल्याण संघ अपनी पांच सूत्रीय मांगो को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गया हैं. परिवहन कल्याण संघ के अध्यक्ष लखविंदर सिंह (लक्की) ने कहा कि इंडस्ट्रीज और उद्योगपति, वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों पर दबाव बनाते आ रहे है. पिछले लगभग 25 साल से सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र CSIDC द्वारा डेवलप हुआ है. किसानों की जमीनों को अधिग्रहित कर उद्योगों का निर्माण किया गया है. इन उद्योगों के निर्मांण के बाद रोजी रोटी का एक ही माध्यम बच गया. हमारे साथियों ने जमीन बेंचकर ट्रक, गाड़ियां खरीदी ताकि जीवन यापन किया जा सके. लेकिन उद्योगपति षड्यंत्र पूर्वक अपनी परिचितों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने ही परिवार को काम दे देते हैं. जिससे वे बिचौलिया भूमिका को निभाते हुए 20 से 25 रुपया कमाने के बाद कार्य दिया जाता है. उद्योगपति दबाव बनाकर 140 रुपए प्रति टन पर कार्य कराते हैं. जबकि इससे पहले साल 2014 में स्टील एसोसिएशन ने 170 रुपए में कार्य करने की अनुमति दी थी. इसके बाद महंगाई बढ़ती चली गई, लेकिन किराया कम होते चला गया.
उन्होंने कहा कि इन सब पर अंकुश लगाने के लिए संघ का निर्माण का किया गया है. इसके माध्यम से जो भी परिवहन हो, वो संघ के ही बैनर तले हो. ताकि कोई भी उद्योगपति अपनी मनमानी न कर सके. इन उद्योगपति ड्राइवरों से कांटे के नाम पर अवैध वसूली की जाती है. आज हमारे साथी आत्महत्या पर मजबूर हैं. सिलतरा क्षेत्र का वायु प्रदूषण पूरे विश्व में सबसे अधिक है. इसके बावजूद एनजीटी गाइड लाइन को किनारे रख मनमाने ढंग से उद्योगों का निर्माण कर रहे हैं. इन्हीं सबके विरोध में प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर आए हैं. उनकी मांगों को पूरा नहीं किए जाने तक प्रदर्शन जारी रहेगा. इस बार हम आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं. स्थानीय होने के नाते कार्य में प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
जानिए संघ की पांच सूत्रीय प्रमुख मांगे ?
1- प्लांट से अवैध रूप से कांटा के पैसों की वसूली पूरी तरह बंद होनी चाहिए.
2- गाड़ियो की लोडिंग और खाली कराने की समय सीमा तय होनी चाहिए.
3- विचोलिया प्रथा पूरी तरह से बंद होनी चाहिए.
4- प्लांटों के औद्योगिक कार्यों में स्थानीय लोगो को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
5- सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में एनजीटी के गाइड लाइन के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए.
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