कुंदन, कुमार पटना। बिहार में वर्ष 2016 में 5 अप्रैल को पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। कल रविवार (5 अप्रैल) को प्रदेश में शराबबंदी को 10 साल हो गए। हालांकि राज्य में पूर्ण शराबबंदी होने के बाद भी प्रदेश के हर कोने से कहीं न कहीं रोजाना शराब पीने से मौत व शराब तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं। ताजा उदाहरण मोतिहारी जिले का है, जहां बीते कुछ दिनों में जहरीली शराब पीने से अब तक 10 लोगो की मौत हो गई है। वहीं, 16 लोगो का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। ऐसे में शराबबंदी के 10 साल होने पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस कानून की विफलता को लेकर सवाल उठाया है।

शराबबंदी की विफलता का दोषी कौन?

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि, शराबबंदी की विफलता का दोषी कौन? मेरे सवालों, तर्कों और तथ्यों का जवाब दें। उन्होंने कहा कि, शराबबंदी कानून को लागू किए कल 10 वर्ष पूर्ण हुए लेकिन यह शासन-प्रशासन और शराब माफिया के नापाक मजबूत गठजोड़ की बदौलत यह कानून अपने उद्देश्य की पूर्ति में एकदम विफल रहा।

शराबबंदी सबसे बड़ा सांस्थानिक भ्रष्टाचार

तेजस्वी ने कहा कि, शराबबंदी नीतीश कुमार का सबसे बड़ा सांस्थानिक भ्रष्टाचार साबित हुआ। इसके कारण बिहार में 40 हजार करोड़ की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है। शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की देखरेख वाले गृह और मद्य निषेध विभाग भी अधिकांश इनके पास ही रहे है। उन्होंने कहा कि, शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में 11 लाख केस दर्ज कर 16 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, अब तक 5 करोड़ लीटर से अधिक शराब बरामद की गई है।

हर दिन होती है 1 लाख 70 लाख लीटर से अधिक की खपत

नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, विगत 5 साल में 2 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है। यानि प्रतिदिन औसतन 11 हजार लीटर से अधिक! बिहार पुलिस के अपने आंकड़ों के अनुसार 2026 में औसतन 3 लाख 70 हजार 684 लीटर प्रति महीने अवैध शराब बरामद की गई है यानि 12,356 लीटर प्रतिदिन।

तेजस्वी यादव ने कहा कि, यह तो सिर्फ दिखावटी जब्त शराब है लेकिन जमीनी सच्चाई के अनुसार बिहार में प्रतिदिन शराब की खपत 1 लाख 70 लाख लीटर से अधिक की है। बिहार सरकार के मुताबिक 2026 में 18 प्रतिशत अधिक शराब बरामद की गई यानि शराबबंदी और पुलिस के दकियानुसी आंकड़ों के बावजूद भी बरामदगी में 18% का उछाल है। उन्होंने कहा कि, अवैध शराब के अलावा इस कानून की विफलता के कारण बिहार में सूखा और अन्य प्रकार के नशे की सामग्री का कारोबार 40 फीसदी बढ़ा है। युवा गांजा, ब्राउन शुगर व नशीली दवाओं का सेवन कर रहे हैं।

10 साल में खुलीं 6000 से अधिक शराब की दुकानें

तेजस्वी यादव ने कहा कि, अब आप कल्पना करिए कि वास्तविकता में बिहार में शराब की उपलब्धता कितनी सहज और सरल है? सरकार यह क्यों नहीं बताती कि बिहार की सीमा में करोड़ो लीटर शराब कब, कैसे, क्यों और किसके सहयोग से आ रही है? कोई पैराशूट से तो गिराकर जाता है नहीं? सरकार जब्त की बजाय खपत के भी आंकड़े सार्वजनिक करे।

उन्होंने कहा कि, आपको जानकर हैरानी होगी कि 2004-05 में संपूर्ण बिहार के ग्रामीण इलाकों में 500 से भी कम शराब की दुकानें थीं। 2005 में पूरे बिहार में लगभग 3000 हजार शराब की दुकाने थी, जो मात्र 2015 तक नीतीश कुमार के 10 वर्षों में बढ़कर 6000 से अधिक हो गई। और इनमें से अधिकांश दुकाने नीतीश कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों-पंचायतों में खुलवाई ताकि हर घर शराब पहुंचाई जा सके।

16 लाख से अधिक लोगों की गिरफ्तारी

नेता प्रतपिक्ष ने कहा कि, आप कल्पना कीजिए आजादी के बाद 1947 से लेकर 2005 में यानि 58 वर्षों में बिहार में केवल 3000 दुकाने ही खोली गई, लेकिन नीतीश कुमार ने 10 वर्षों में ही इसे बढ़ाकर दुगुना यानि 6000 कर दिया। 58 वर्षों में औसतन बिहार में प्रति वर्ष संपूर्ण बिहार में मात्र 51 दुकाने ही खुलती रही लेकिन इनके 2005-2015 के 10 वर्षों में प्रतिवर्ष औसतन 300 शराब की दुकाने खोली गई।

तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि, आज ये शराबबंदी के नाम पर सुधारक बनने का स्वांग कर रहे है, लेकिन यथार्थ यह है कि इसके नाम पर इन्होंने संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर अफसरशाही को बेलगाम, भ्रष्ट, आरामपरस्त और तानाशाह बनाया है। उन्होंने कहा कि, बिहार में शराबबंदी कानून अब मजाक बन गया है। इस कानून की आड़ में केवल गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। शराबबंदी कानून के तहत करीब 16 लाख से अधिक जिन लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं। इनमें सबसे अधिक गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोग हैं।

तेजस्वी का सरकार पर बड़ा हमला

तेजस्वी यादव ने कहा कि, बिहार में शराबबंदी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि पुलिस के कारण ही शराब की तस्करी हो रही है और पुलिस का एकमात्र काम रह गया है भ्रष्टाचार, उगाही और कानून का दुरुपयोग करने वालों को संरक्षण देना। 16 लाखों लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद भी सप्लायर और तस्करों को गिरफ्तार नहीं किया गया, किसी भी जिले के एसपी, डीएसपी या बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने यहां तक कहा कि, सरकार जिसको चाहती है, उसी पर कार्रवाई होती है, चयनात्मक कार्रवाई होती है। सरकार उन अधिकारियों और प्रशासनिक लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जो भ्रष्टाचार के माध्यम से शराबबंदी को विफल करना चाहते हैं?

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