चंडीगढ़। हरियाणा सरकार को नगर निगम चुनावों को लेकर बड़ी राहत मिली है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एससी आरक्षण से जुड़ी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे राज्य सरकार का निर्णय बरकरार रह गया है।
याचिका में क्या था विवाद?
पूर्व पार्षद उषा रानी सहित कई याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार की उस प्रक्रिया को चुनौती दी थी, जिसमें नगर निगमों में सीटों के आरक्षण और परिसीमन के लिए जनगणना के बजाय फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी (FIDR) को आधार बनाया गया था।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 243-P के अनुसार “जनसंख्या” का अर्थ केवल अंतिम जनगणना के आंकड़ों से लिया जाना चाहिए। जबकि राज्य सरकार ने 2023 और 2024 में नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर FIDR डेटा को आधार बना दिया।
पारदर्शिता पर सवाल
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इस बदलाव से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होती है। साथ ही पंचकूला नगर निगम के वार्ड परिसीमन को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें आपत्तियों पर विचार किए बिना अंतिम अधिसूचना जारी करने का आरोप लगाया गया।
हाईकोर्ट का फैसला
सभी दलीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया, जिससे नगर निगम चुनावों में एससी आरक्षण से जुड़ी अधिसूचना वैध बनी रहेगी।
महत्वपूर्ण असर
इस फैसले से हरियाणा सरकार को चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कानूनी राहत मिली है और नगर निगम चुनावों की तैयारी को अब गति मिलने की संभावना है।

