बलवंत भट्ट, मंदसौर। मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा तीन दिवसीय मंदसौर दौरे पर है। दौरे के दूसरे दिन आज अचानक वे जिले के बादाखेड़ी गांव में संचालित हो रहे स्कूल पहुंची। जहां बेहद ही चौंकाने वाले खुलासे हुए है। यहां स्कूल के नाम से अवैध मदरसे का संचालन किया जा रहा था। रिकॉर्ड में मौजूद बच्चियों की संख्या से अधिक बच्चियों का सामना आयोग को मिला। छात्र और छात्राओं दोनों की अनुमति के बावजूद सिर्फ एक ही वर्ग की छात्राओं को पढ़ाया जा रहा था। आयोग ने इसको लेकर शिक्षा विभाग को एफआईआर करने की अनुशंसा की है।
स्कूल की जगह मदरसे और हॉस्टल का संचालन
मंदसौर में स्कूल की आड़ में मदरसा संचालित किया जा रहा था। जहां सिर्फ छात्राओं को ही शिक्षा दी जा रही थी। गुरुवार को जब मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष यहां पहुंची तो पूरा मामला सामने आया। आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि, मंदसौर के बादाखेड़ी गांव में निरीक्षण के दौरान बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यहां मोइनिया एजुकेशन सोसायटी के नाम से स्कूल की जगह मदरसे और हॉस्टल का संचालन किया जा रहा है।

स्कूल की ली थी अनुमति, सिर्फ छात्राओं को दी जा रही थी शिक्षा
बीते वर्ष स्कूल की ओर से छठी कक्षा से आठवीं कक्षा की अनुमति ली गई थी। लेकिन बावजूद इसके यहां से आयोग को प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक की पुस्तके मिली है। साथ ही मौके पर 100 से अधिक बच्चियों का सामान भी मिला है। जबकि स्कॉलर रिकॉर्ड में 76 तो वही पोर्टल पर 36 बच्चियों की जानकारी ही दी गई थी। आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि, स्कूल की मान्यता तो छात्र और छात्राओं दोनों की है। लेकिन यहां सिर्फ छात्राओं को ही शिक्षा दी जा रही थी। इसी कारण आयोग ने शिक्षा विभाग को इस पर एफआईआर करने के निर्देश दिए है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की कही बात
मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिंज का कहना है कि, बाल आयोग के अध्यक्ष के साथ वे भी मौके पर पहुंची थी। जहां नियमों के खिलाफ इसका संचालन किया जा रहा था। अवैध रूप से मदरसे का संचालन करने के दौरान बिना अनुमति के हॉस्टल भी चलाया जा रहा था। उन्होंने माना कि, यह स्कूल गोपनीय तरीके से बिना शिक्षा विभाग को सूचित किए संचालित किया जा रहा था। जल्द आगे की कार्रवाई करवाई जाएगी।


