RAS Officer Death Case: राजस्थान की 2016 बैच की RAS अधिकारी प्रियंका विश्नोई की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-8 के आदेश पर चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने वसुंधरा हॉस्पिटल के संचालकों और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की है। मामला धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और साक्ष्यों से कथित छेड़छाड़ समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई नई FIR
थानाधिकारी गोविंदलाल व्यास के अनुसार, अदालत के निर्देश के बाद वसुंधरा हॉस्पिटल के संचालक डॉ. संजय मकवाना, डॉ. रेणु मकवाना, डॉ. विनोद शैली और डॉ. जितेंद्र खेतावत के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच की जिम्मेदारी एएसआई महेंद्र कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अब अस्पताल के लैब रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR), डिजिटल डेटा और अन्य दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराएगी।
परिजनों का आरोप, मेडिकल रिकॉर्ड में किया गया बदलाव
प्रियंका विश्नोई के परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही को छिपाने के लिए अस्पताल की ओर से मेडिकल दस्तावेजों में बाद में बदलाव किए गए। उनका कहना है कि पुलिस और जिला प्रशासन की जांच समिति को ऐसे रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए, जिनमें दर्ज समय और उपचार संबंधी जानकारी वास्तविक घटनाक्रम से मेल नहीं खाती।
RTI से मिले दस्तावेजों के आधार पर उठाए सवाल
परिजनों का दावा है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, 5 सितंबर 2024 को प्रियंका विश्नोई का ब्लड सैंपल दोपहर 12:15 बजे लिया गया और उसकी रिपोर्ट 1:30 बजे तैयार हुई, जबकि ऑपरेशन दोपहर 1:05 बजे शुरू कर दिया गया था। परिजनों ने सवाल उठाया है कि आवश्यक जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने से पहले सर्जरी कैसे शुरू की गई।
बैकडेट एंट्री और फर्जी रिकॉर्ड का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एनेस्थीसिया रिकॉर्ड में जांच पूरी होने का समय वास्तविक प्रक्रिया से पहले दर्ज किया गया। परिजनों का कहना है कि बाद में बैकडेट एंट्री कर मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए गए ताकि जांच एजेंसियों और अदालत के समक्ष अस्पताल की भूमिका पर सवाल न उठें। इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत से नई एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी थी तबीयत
प्रियंका विश्नोई 2016 बैच की RAS अधिकारी थीं। 5 सितंबर 2024 को पेट दर्द की शिकायत के बाद जोधपुर के वसुंधरा हॉस्पिटल में उनकी बच्चेदानी का ऑपरेशन किया गया था। अगले दिन उनकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां करीब 13 दिन इलाज के बाद 18 सितंबर 2024 को उनका निधन हो गया।
पहले मिल चुकी थी क्लीन चिट
इस मामले में पहले मेडिकल कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया गया था। हालांकि, अब इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कथित हेरफेर के नए आरोपों के बाद अदालत ने नई एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पहले लगाए गए आरोपों की जांच हो चुकी है और उन्हें पहले ही राहत मिल चुकी थी।

