कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। देश में Minimum Support Price (न्यूनतम समर्थन मूल्य – MSP) किसानों के हितों की सुरक्षा का सबसे बड़ा सरकारी तंत्र माना जाता है। हर सीजन में केंद्र और राज्य सरकारें गेहूं, धान सहित कई फसलों की खरीद MSP पर करती हैं, ताकि किसानों को न्यूनतम कीमत की गारंटी मिल सके।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में MSP सिस्टम पर लगातार सवाल उठते रहे है। कई राज्यों में बिचौलिया तंत्र (मिडिलमैन सिस्टम) हावी नजर आता है। फर्जी रजिस्ट्रेशन और डुप्लीकेट खरीद के मामले सामने आए है। असली किसान को पूरा लाभ नहीं मिल रहा और बिचौलियों की जेबें गर्म हो रही है।

इसी पृष्ठभूमि में अब एक नया सवाल खड़ा हुआ है—क्या MSP खरीद में बायोमेट्रिक जरूरी किया जाए? ताकि बिचौलिया प्रथा को खत्म किया जा सके।
और क्या हरियाणा इस दिशा में प्रयोग कर रहा है?

MSP में बायोमेट्रिक सिस्टम: क्या है पूरा मॉडल?
बायोमेट्रिक सिस्टम का मतलब है – किसान की पहचान उसके फिंगरप्रिंट (अंगुली छाप) या आईरिस स्कैन (आंख की पुतली) से सत्यापित किया जाए। खरीद केंद्र पर किसान की फिजिकल उपस्थिति अनिवार्य हो, ताकि खरीद की पूरी जानकारी किसान की जानकारी में रहे। उसके हर ट्रांजैक्शन को आधार लिंक (Aadhaar linking – पहचान जुड़ाव) से जोड़ा जाए। इस मॉडल में कोई भी व्यक्ति बिना वास्तविक किसान की मौजूदगी के फसल नहीं बेच पाएगा।

MSP में बिचौलिया सिस्टम: कैसे होता है खेल?
MSP खरीद में बिचौलियों की भूमिका लंबे समय से विवादों में रही है। सिस्टम का दुरुपयोग कई तरीकों से किया जाता है, जैसे छोटे किसानों से फसल कम कीमत पर खरीदना और फिर उसी फसल को मंडी में MSP पर बेचकर मुनाफा कमाना शामिल है। इसके अलावा फर्जी किसान आईडी (Fake Farmer ID) बनाकर सरकारी खरीद दिखाना और एक ही जमीन या किसान के नाम पर बार-बार बिक्री दिखाना भी शामिल है।

परिणाम:
बिचौलियों द्वारा ऐसा करने से असली किसान को नुकसान उठाना पड़ता है।
सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है। खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता खत्म हो जाती है।

हरियाणा में क्या हो रहा है? बायोमेट्रिक का पायलट प्रयोग
हरियाणा, जो MSP खरीद में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है, अब इस समस्या का समाधान खोजने के लिए बायोमेट्रिक आधारित खरीद प्रणाली का परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) कर रहा है। इससे ग्राउंड पर कई बदलाव देखने को मिले। मंडियों में बायोमेट्रिक मशीनों की तैनाती की गई है।किसान को खुद आकर पहचान सत्यापित करनी पड़ रही है। आधार से लिंक डेटा के आधार पर खरीद दर्ज हो रही है

शुरुआती संकेत बताते हैं:
इस सिस्टम को लागू करने से फर्जी खरीद में कमी के प्रयास किए जा रहे है। सिस्टम में डेटा पारदर्शिता बढ़ी है। लेकिन तकनीकी बाधाएं भी सामने आईं है।

क्या बायोमेट्रिक से खत्म होगा बिचौलिया सिस्टम?
यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह कदम बिचौलियों को पूरी तरह खत्म कर देगा? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है।
संभावित फायदे की बात करे तो फर्जी किसान और डुप्लीकेट एंट्री पर रोक लगी है। सीधे असली किसान को भुगतान हो रहा है और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है।

जमीनी चुनौतियां:
बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या की है। बुजुर्ग किसानों के फिंगरप्रिंट मैच न होना भी एक बड़ी समस्या है। लंबी कतारें, प्रक्रिया में देरी और तकनीकी खराबी से खरीद बाधित होती है।

यानी यह सिस्टम बिचौलियों पर लगाम तो लगा सकता है, लेकिन पूरी तरह खत्म करना अभी चुनौतीपूर्ण है।

किसानों की प्रतिक्रिया: राहत या नई परेशानी?
हरियाणा के किसानों के बीच इस प्रयोग को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।


सकारात्मक पहलू:
असली किसान को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद
फर्जीवाड़ा कम होने की संभावना

चिंता के मुद्दे:
तकनीकी जानकारी की कमी
मंडियों में समय ज्यादा लगना
बुजुर्ग और छोटे किसानों को दिक्कत

विशेषज्ञों की राय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमेट्रिक सिस्टम एक मजबूत फिल्टर (Strong Filter – छंटनी तंत्र) साबित हो सकता है, लेकिन इसे अकेले लागू करना पर्याप्त नहीं होगा। इससे समाधान अधूरा, लेकिन दिशा सही मिलेगी।

जरूरी सुधार
मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
मंडी स्तर पर ट्रेनिंग और सपोर्ट
लगातार निगरानी और ऑडिट

आगे का रास्ता: क्या पूरे देश में लागू होगा मॉडल?
अगर हरियाणा का पायलट सफल रहता है, तो अन्य राज्यों में भी इसे लागू किया जा सकता है। MSP खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। किसानों को सीधे लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।

लेकिन इसके लिए जरूरी है कि तकनीकी खामियों को दूर किया जाए। किसानों को जागरूक किया जाए। सिस्टम को सरल और तेज बनाया जाए।

निष्कर्ष
MSP सुधार की दिशा में बायोमेट्रिक एक बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन राह आसान नहीं है। MSP खरीद में बायोमेट्रिक लागू करने की पहल हरियाणा सरकार का एक बड़ा सुधारात्मक कदम है। इसका उद्देश्य साफ है—
बिचौलिया तंत्र पर रोक
फर्जीवाड़े को खत्म करना
असली किसान तक लाभ पहुंचाना

हरियाणा में हो रहा प्रयोग यह संकेत देता है कि सरकार इस दिशा में गंभीर है, लेकिन जमीनी चुनौतियों को हल किए बिना इसका पूर्ण प्रभाव संभव नहीं होगा।

बायोमेट्रिक सिस्टम MSP में सुधार की शुरुआत जरूर है, लेकिन बिचौलिया सिस्टम पर पूरी चोट अभी बाकी है।