बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड क्षेत्र में कृषि योजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। किसानों को मिलने वाले खाद, बीज और कृषि किट में भारी अनियमितता सामने आई है। शिकायत के बाद एक करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की जांच शुरू कर दी गई है।

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आरोप है कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 में कागजों में खरीदी दिखाई गई। विभिन्न जनपद पंचायतों के अफसरों और एजेंसियों की भूमिका जांच में है। दस्तावेजों में वितरण दिखाकर सरकारी राशि निकालने का आरोप लगाया गया है। जमीनी स्तर पर कई किसानों तक सामग्री पहुंची ही नहीं बताई जा रही है।

अब बिल, वाउचर और स्टॉक रिकॉर्ड विभागों से तलब किए गए हैं। भौतिक सत्यापन के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। स्थानीय किसानों ने कहा योजना का लाभ उन्हें कभी नहीं मिला। प्रशासन ने गड़बड़ी साबित होने पर वसूली की चेतावनी दी है।कृषि सहायता योजना अब भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ी नजर आ रही है।

जंगलों के बीच एआई क्रांति, 10 हजार छात्र होंगे हाईटेक

जगदलपुर। बस्तर की शिक्षा व्यवस्था अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश कर रही है। जिला प्रशासन ने 10 हजार छात्रों को एआई शिक्षा से जोड़ने की तैयारी की है। धरमपुरा पॉलिटेक्निक कॉलेज में तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित हुई। 15 से 17 अप्रैल तक शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स सिखाए गए। चॉक-डस्टर की जगह अब स्मार्ट शिक्षण मॉडल पर जोर दिया गया।

प्रशिक्षक नयन सोरी ने एआई को पढ़ाई से जोड़ने के तरीके बताए। गणित और विज्ञान शिक्षकों ने व्यावहारिक प्रशिक्षण भी लिया। कार्यक्रम में 21वीं सदी के तकनीकी कौशलों पर विशेष फोकस रहा। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। ग्रामीण अंचल के बच्चों में तकनीकी रुचि बढ़ाने की योजना है। अब छात्र सिर्फ किताब नहीं, कोडिंग भी सीखेंगे। बस्तर का विद्यार्थी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा।

305 साल का हुआ शहर, 16 झोपड़ियों से लाखों की आबादी तक सफर

जगदलपुर। अक्षय तृतीया 2026 पर जगदलपुर शहर ने 305 वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 1721 में महाराजा दलपत देव ने राजधानी यहां स्थानांतरित की थी। उस समय यह क्षेत्र जगतूगुड़ा नाम से जाना जाता था।

बताया जाता है कि यहां केवल 16 झोपड़ियां मौजूद थीं। कबीले के मुखिया जगतु माहरा के नाम से यह इलाका पहचाना जाता था। जगतू और दलपत शब्दों से शहर का नाम जगदलपुर पड़ा। आज शहर 48 वार्डों में फैल चुका है और आबादी लाखों में है। दंतेश्वरी मंदिर के पीछे पुराने निर्माण आज भी इतिहास बताते हैं।

राजमहल और सिंहद्वार का निर्माण बाद के दौर में हुआ था। शहर अब प्रशासन, व्यापार और संस्कृति का बड़ा केंद्र बन चुका है। विस्तार होने पर आबादी ढाई लाख पार पहुंचने का अनुमान है। 16 झोपड़ियों से आधुनिक नगर बनने तक जगदलपुर ने लंबा सफर तय किया।

मजदूरों का पैसा खाने पर प्रबंधक बर्खास्त, भ्रष्टाचार पर बड़ी चोट

सुकमा। कुकानार प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति में बड़ी कार्रवाई की गई है। तेंदूपत्ता भुगतान घोटाले में प्रबंधक मड़काम देवेंद्र को बर्खास्त कर दिया गया। मामला मजदूरों और फड़ मुंशियों के भुगतान से जुड़ा बताया गया है। शिकायत मिली थी कि मेहनताना और मानदेय समय पर नहीं मिला। इसके बाद डीएफओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी।

जांच में 4 लाख 19 हजार रुपये की गड़बड़ी सामने आई। 17 फड़ों में शाख कर्तन राशि रोकने का आरोप लगा। 24 फड़ मुंशियों का भुगतान भी अटकाया गया था। इस मामले में दो अन्य कर्मचारी पहले ही निलंबित हो चुके हैं। अब मुख्य जिम्मेदार पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई हुई है। प्रशासन ने जल्द नए प्रबंधक की नियुक्ति की बात कही है। संदेश साफ है, मजदूरों के हक पर डाका अब बर्दाश्त नहीं होगा।

रेल लाइन से बदलेगी तस्वीर, 65 साल पुरानी मांग को रफ्तार

नारायणपुर। रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। करीब 140 किलोमीटर लंबी लाइन बस्तर को नए नेटवर्क से जोड़ेगी। इस कॉरिडोर में जगदलपुर, कोंडागांव, नारायणपुर और दल्लीराजहरा शामिल हैं। नारायणपुर इस परियोजना का अहम केंद्र बनकर उभर रहा है। अब तक सड़क पर निर्भर इलाका रेल सुविधा की ओर बढ़ रहा है। खनिज, वन उत्पाद और व्यापारिक परिवहन को सीधा लाभ मिलेगा। यात्रियों के लिए सफर आसान और समय कम होने की उम्मीद है।

परियोजना की अनुमानित लागत 3513 करोड़ रुपये बताई गई है। रेल कॉरिडोर में 12 नए स्टेशन विकसित किए जाएंगे। भूमि अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया को तेजी दी जा रही है। वर्ष 2028 तक काम पूरा होने की संभावना जताई गई है। यह परियोजना बस्तर की विकास पटरी पर बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।

तेंदूपत्ता सीजन तैयार, 31 हजार परिवारों को मिलेगा सहारा

कोंडागांव। वनमंडल कोंडागांव में तेंदूपत्ता संग्रहण की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष 19,200 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है। संग्राहकों को 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान मिलेगा। करीब 31 हजार परिवार इस कार्य से जुड़े हुए हैं। मौसम अनुकूल रहा तो 25 अप्रैल से खरीदी शुरू हो सकती है।

पत्तों की गुणवत्ता को देखते हुए तिथि तय की जाएगी। व्यवस्था संभालने 3 गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी लगाए गए हैं। 7 जोनल अधिकारी और 13 प्रबंधक भी तैनात किए गए हैं। 245 फड़ अभिरक्षक और 245 फड़ मुंशी मैदान में रहेंगे। वन विभाग समेत अन्य विभागों के कर्मचारी ड्यूटी पर लगाए गए हैं। गोदाम प्रभारी और उड़नदस्ता दल भी सक्रिय रहेंगे। तेंदूपत्ता सीजन से हजारों परिवारों की आय में राहत आने वाली है।