मुजफ्फरपुर। 70 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी हरेंद्र कुमार के लिए 26 मार्च की वह सुबह किसी काल बनकर आई। एक व्हाट्सएप कॉल ने न केवल उनके जीवन भर की जमा-पूंजी छीन ली, बल्कि उन्हें और उनकी पत्नी को ऐसे मानसिक खौफ में धकेल दिया जिससे वे आज भी उबर नहीं पा रहे हैं। साइबर अपराधियों ने खुद को एटीएस (ATS) अधिकारी बताकर उन्हें 15 दिनों तक उनके ही घर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और 18.85 लाख रुपए ठग लिए।

​एटीएस अधिकारी बनकर दी आतंकी साजिश की धमकी

​हरेंद्र कुमार, जो 2018 में एलएन मिश्रा कॉलेज से रिटायर हुए थे, बताते हैं कि ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल पर डराया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों और टेरर फंडिंग के लिए किया गया है। वर्दी और सरकारी एजेंसी का धौंस दिखाकर अपराधियों ने दावा किया कि उनके नाम पर जारी एक फर्जी सिम के जरिए केनरा बैंक में खाता खोला गया है, जिसका सीधा संबंध आतंकी संगठनों से है।

​15 दिनों का खौफनाक ‘डिजिटल अरेस्ट’

​26 मार्च से 11 अप्रैल तक बुजुर्ग दंपत्ति को वीडियो कॉल के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी में रखा गया। उन्हें फोन या टीवी देखने की अनुमति नहीं थी और न ही वे किसी से बात कर सकते थे। ठगों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि आरबीआई के निर्देशानुसार, केस खत्म करने के लिए उन्हें सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। कानूनी कार्रवाई के डर से हरेंद्र कुमार ने आरटीजीएस (RTGS) के जरिए तीन अलग-अलग कंपनियों (जेस्टी सक्कर और अमीन रोडलाइंस) के खातों में कुल 18.85 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।

​खबर पढ़कर टूटा भ्रम, पुलिस ने 9 लाख कराए होल्ड

​ठगी का खुलासा तब हुआ जब हरेंद्र कुमार ने अखबार में एक रिटायर्ड बैंक कर्मी के साथ हुई वैसी ही ठगी की खबर पढ़ी। उन्हें एहसास हुआ कि वे भी जालसाजों के चंगुल में फंस चुके हैं। उन्होंने तुरंत 12 अप्रैल को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने त्वरित कार्रवाई की और ठगी गई राशि में से 9 लाख रुपए होल्ड करा दिए हैं।

​टूटी मानसिक स्थिति और डर का माहौल

​आज स्थिति यह है कि हरेंद्र कुमार इस घटना का जिक्र करते ही रो पड़ते हैं। वे कहते हैं, आज भी वह दिन याद करके पैर कांपते हैं, पत्नी की धड़कनें बढ़ जाती हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि साइबर अपराधी किस तरह बुजुर्गों की लाचारी और कानून के डर का फायदा उठाकर उनकी पूरी दुनिया तबाह कर रहे हैं।