चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि एक ही एफआईआर में गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके हैं, तो उसी मामले में दोबारा गिरफ्तारी के समय कारणों को फिर से बताना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है।
यह फैसला जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की पीठ ने एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने अपनी दोबारा गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट जारी कर रिहाई की मांग की थी।


जानें क्या है मामला
मामला भिवानी के सिविल लाइंस थाने में फरवरी 2026 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 और शस्त्र अधिनियम की धाराएं लगाई गई थीं। याचिकाकर्ताओं को पहले गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, जहां प्रक्रिया में कमी के चलते गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए रिहा कर दिया गया।


हालांकि, बाद में अनुमति लेकर उसी दिन दोबारा गिरफ्तारी की गई और फिर से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि दूसरी गिरफ्तारी से पहले उन्हें कारण नहीं बताए गए, इसलिए यह अवैध है।

अदालत ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि पहली गिरफ्तारी के दौरान ही दोपहर में आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार बता दिए गए थे। इसके बाद शाम को दोबारा गिरफ्तारी हुई और निर्धारित समय के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी भी की गई।


कोर्ट ने क्या कहा ?
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी से कम से कम दो घंटे पहले गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है, और इस मामले में यह शर्त पूरी की गई थी।
अदालत ने यह भी कहा कि एक ही एफआईआर में हर बार गिरफ्तारी के कारणों को दोहराना जरूरी नहीं है, क्योंकि एक बार जानकारी दिए जाने के बाद आरोपी को अपने खिलाफ आरोपों की समझ हो जाती है।


गंभीर आरोपों—जिनमें अदालत परिसर में गोलीबारी भी शामिल है—और कुछ आरोपियों के आपराधिक इतिहास को देखते हुए अदालत ने दोबारा गिरफ्तारी को वैध माना और याचिका को खारिज कर दिया।