​पटना। शहर की सड़कों पर बुधवार को नारों की गूंज तो खूब थी, लेकिन उन नारों के पीछे का उद्देश्य कहीं गुम नजर आया। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) द्वारा महिला आरक्षण संशोधन बिल के संसद में गिरने के विरोध में आयोजित ‘धिक्कार मार्च’ ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तो छेड़ी, लेकिन रैली में शामिल महिलाओं की अनभिज्ञता ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​मुद्दे से बेखबर ‘शक्ति’: सब आए तो हम भी आ गए

​रैली में शामिल महिलाओं के हाथों में ‘नारी को दो समान अधिकार’ जैसी तख्तियां तो थीं, लेकिन जब उनसे विरोध का कारण पूछा गया, तो जवाब चौंकाने वाले थे। अनीता देवी ने बेबाकी से कहा, हमें मुद्दे की जानकारी नहीं है, बस कहा गया कि चलना है तो चले आए। वहीं सन्नो खातून का कहना था कि उन्होंने अपनी चचेरी बहन को जाते देखा, तो वह भी साथ हो लीं। गुड़िया नामक महिला ने बताया कि परिवार वालों के बुलावे पर वह आ गईं। यह स्थिति दर्शाती है कि भीड़ तो जुटाई गई, पर उन्हें बिल की बारीकियों या आंदोलन के मकसद से अवगत नहीं कराया गया।

​महिला आरक्षण की रैली

​उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया था कि बिहार के 38 जिलों से महिलाएं अपने हक के लिए पटना आएंगी। हालांकि, हकीकत इसके उलट दिखी। मार्च में महिलाओं की तुलना में पुरुष कार्यकर्ताओं की तादाद कहीं ज्यादा थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि खुद कुशवाहा के परिवार की महिला सदस्य, विधायक और पार्टी की प्रमुख महिला नेत्री भी इस मार्च से नदारद दिखीं। केवल 3-4 महिला चेहरे ही पूरी रैली का नेतृत्व करते नजर आए।

​अधूरा मार्च और भटकाव

​एमएलए फ्लैट से डाकबंगला चौराहा तक प्रस्तावित इस मार्च में उत्साह की कमी साफ दिखी। आधे रास्ते (इकम टैक्स चौराहा) से ही अधिकतर महिलाएं वापस लौटने लगीं। जब मीडिया ने उनसे सवाल किए, तो कई महिलाएं पल्लू से चेहरा छिपाती दिखीं। किसी ने गरीबी दूर करने की बात कही तो किसी ने नौकरी की, जबकि रैली का मुख्य एजेंडा 131वां संविधान संशोधन विधेयक था।

​क्या था विवाद का केंद्र?

​17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था। सरकार का लक्ष्य लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करना और महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को 2029 तक लागू करना था। विपक्ष ने इसका विरोध ‘परिसीमन’ की शर्त को लेकर किया, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों को अपना प्रतिनिधित्व घटने का डर है। इसी विफलता के खिलाफ उपेंद्र कुशवाहा ने ‘धिक्कार रैली’ का आह्वान किया था।