रायपुर। राम अवतार जग्गी हत्यकांड मामले में दोषी अमित जोगी के लिए 29 अप्रैल का दिन बेहद खास है. अमित जोगी का कहना कि 29 अप्रैल को उनका नया जन्म होगा.

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सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद अमित जोगी लगातार भगवान का धन्यवाद कर रहे हैं. गिरफ्तारी लगी रोक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट किया है.

अमित जोगी अपने पिता स्वर्गीय अजीत जोगी को याद करते हुए लिखते हैं कि 9 अप्रैल 2026 को अपने पिताजी, छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री अजीत जोगी जी की समाधि — गौरेला स्थित ‘जोगी स्थल’ — जाऊँगा, उनका आशीर्वाद लेने.

इस दिन पापा की 80वीं जयंती है. इससे उचित अवसर और क्या हो सकता था — कि उन्हीं के चरणों में, मैं परम पिता परमेश्वर के असीम अनुग्रह से अपने जीवन को एक बार फिर छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा में समर्पित करूँ. यह दिन मेरा नया जन्म है.

बता दें कि एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए सीबीआई का जवाब आने तक सरेंडर पर रोक लगाई है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी.

2007 में निचली अदालत ने किया बरी

एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की साल 2003 में हुई हत्या के मामले में निचली अदालत ने 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों का अभाव बताते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था. हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था.

2004 में सीबीआई ने शुरू की जांच

सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर जग्गी हत्याकांड का आरोप लगाया था. केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने जांच के बाद करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 31 लोगों को आरोपी बनाया गया. मई 2007 में स्पेशल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. दो लोग सरकारी गवाह बन गए, जबकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था.

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