पटना। बिहार के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद सम्राट चौधरी ने पहली बार राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ सीधा संवाद किया। एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य में सुशासन और कानून-व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों को ‘रिजल्ट’ देने के लिए दो महीने का समय दिया है।

​अपराधियों के खिलाफ ‘डेथ वारंट’ जैसा तेवर

​मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा, छोटी बच्चियों के साथ अपराध करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें। पीड़ित की तेरहवीं होने से पहले अपराधी की तस्वीर पर माला पहना दी जानी चाहिए। उनका आशय अपराधियों को त्वरित मुठभेड़ या कानूनी प्रक्रिया के जरिए खत्म करने या जेल भेजने से था। उन्होंने तत्काल चार्जशीट दाखिल कर कोर्ट से कड़ी सजा दिलाने पर जोर दिया।

​’10 से 2 बजे तक’ दफ्तर में मौजूदगी अनिवार्य

​आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ‘टाइम टेबल’ थमा दिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि कोई फील्ड ड्यूटी न हो, तो सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक अनिवार्य रूप से कार्यालय में बैठें और जनता की फरियाद सुनें। उन्होंने कहा कि सही सोच वाले DM-SP अकेले ही जिले की 75% समस्याओं को खत्म कर सकते हैं।

​उद्योगपतियों को सुरक्षा और इन्वेस्टर हब पर जोर

​बिहार के औद्योगिक विकास के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उद्योगपतियों का सुरक्षा कवच बनने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर जिले में ‘इंडस्ट्री हब’ बनाया जाए। जो उद्योगपति बाहर से निवेश करने आएं, उनके साथ एक विशेष अधिकारी को टैग किया जाए ताकि उन्हें संसाधन जुटाने में कोई परेशानी न हो।
​मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी अधिकारियों को अपनी क्षमता का शत-प्रतिशत उपयोग करने और समय का लाभ उठाकर बेहतर परिणाम देने का निर्देश दिया।