चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में पारित “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026” कानूनी विवादों में घिर गया है। एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस नए बेअदबी कानून को चुनौती दी है।
याचिका में इस कानून को धर्म-विशेष, भेदभावपूर्ण और भारतीय संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताया गया है।
संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का तर्क
चर्च की ओर से दायर याचिका में दलील दी गई है कि यह संशोधन एक विशेष धार्मिक ग्रंथ के लिए अलग और कठोर दंड ढांचा प्रदान करता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25 और 26 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। याचिका में मांग की गई है कि इस कानून को रद्द किया जाए और फिलहाल इसके क्रियान्वयन पर तुरंत रोक लगाई जाए।

धर्मनिरपेक्षता पर उठाए सवाल
याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं कि राज्य किसी एक धर्म या उसके पवित्र प्रतीकों को विशेष विधायी सुरक्षा नहीं दे सकता। ऐसा करने से विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच असमानता पैदा होती है। यह कदम भारत के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को कमजोर करता है, जहां राज्य को सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि केवल एक ग्रंथ के लिए कड़ा कानून बनाने से अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को तुलनात्मक रूप से कम सुरक्षा मिलती है, जो राज्य की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
क्या है नया कानून?
पंजाब सरकार ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए कानून में संशोधन कर सजा को और सख्त कर दिया है। इसी ‘सख्त दंड ढांचे’ को अब अदालत में चुनौती दी गई है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट इस पर सुनवाई कर सकता है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
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