कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। आज (2 मई 2026) देशभर के कई लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक तेज सायरन के साथ एक इमरजेंसी अलर्ट मैसेज आया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग असमंजस में पड़ गए कि कहीं कोई बड़ा खतरा तो नहीं आ गया। हालांकि, कुछ ही देर में साफ हो गया कि यह कोई वास्तविक आपात स्थिति नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सरकारी परीक्षण था।

दरअसल, यह अलर्ट भारत सरकार का दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा मिलकर चलाए जा रहे सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम के तहत एक ‘मॉक ड्रिल’ (परीक्षण) का हिस्सा था। इस प्रणाली का उद्देश्य देशभर में ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में लोगों तक तुरंत और प्रभावी तरीके से चेतावनी पहुंचाई जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक पारंपरिक SMS सिस्टम से अलग होती है। इसमें संदेश सीधे नेटवर्क के माध्यम से सभी सक्रिय 4G और 5G मोबाइल डिवाइस तक एक साथ भेजे जाते हैं। यही कारण है कि इस अलर्ट के साथ तेज सायरन की आवाज भी सुनाई दी, ताकि लोगों का तुरंत ध्यान आकर्षित किया जा सके और वे संदेश को नजरअंदाज न करें।

सरकार का कहना है कि इस तरह के परीक्षण इसलिए जरूरी हैं ताकि बाढ़, भूकंप, चक्रवात या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय चेतावनी प्रणाली पूरी तरह से सक्षम और भरोसेमंद बनी रहे। इस टेस्ट के जरिए यह भी परखा जाता है कि विभिन्न मोबाइल नेटवर्क, डिवाइस और क्षेत्रों में यह सिस्टम कितनी तेजी और सटीकता से काम करता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लोगों को ऐसे अलर्ट आने पर घबराने की जरूरत नहीं है। यह केवल एक परीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे समय-समय पर दोहराया जाएगा ताकि आपातकालीन संचार व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके। साथ ही, लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है कि असली आपदा के समय इस तरह के अलर्ट को गंभीरता से लें और दिए गए निर्देशों का पालन करें।