Rajasthan News: अजमेर की विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार (2 मई) को अजमेर जिला न्यायालय में इस बात को लेकर घंटों गहमागहमी रही कि दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने के दावों में कितनी सच्चाई है। हिंदू सेना और महाराणा प्रताप सेना की याचिकाओं पर हुई सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

अदालत में क्या हुआ?

अजमेर जिला कोर्ट में आज का दिन बेहद सरगर्मी भरा रहा। सुबह से ही कोर्ट परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और लोगों की भारी भीड़ जुटी थी। हिंदू पक्ष की ओर से विष्णु गुप्ता और महाराणा प्रताप सेना के पदाधिकारियों ने अपने दावे के समर्थन में कई ऐतिहासिक और कानूनी दस्तावेज पेश किए। वहीं, दरगाह के दीवान और खादिमों के वकीलों ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे माहौल खराब करने की कोशिश बताया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुनवाई के दौरान 12 अलग-अलग अर्जियों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें कई नए लोग भी इस केस में पक्षकार बनने की होड़ में दिखे।

मामले की सबसे बड़ी उलझन यह है कि आखिर इस केस में पक्षकार कौन बनेगा? हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने साफ कहा कि कोर्ट ने सभी को सुना है और अब दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। वहीं, याचिकाकर्ताओं के वकील संदीप कुमार ने कुछ अर्जियों का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि कई लोग बिना ठोस तथ्यों के सिर्फ नाम चमकाने के लिए इस केस में कूद रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक याचिकाकर्ता के खिलाफ पहले से ही वारंट जारी होने की बात भी सामने आई है, जिससे कोर्ट रूम का माहौल और भी गर्मा गया।

दरगाह कमेटी और खादिमों ने कसी कमर

सिर्फ हिंदू संगठन ही नहीं, बल्कि दरगाह के दीवान और खादिम भी कानूनी मोर्चे पर पूरी तरह एक्टिव हैं। दरगाह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सिद्धार्थ ने बताया कि उन्होंने दीवान साहब का पक्ष मजबूती से रखा है। खादिमों का तर्क है कि दरगाह सदियों से साम्प्रदायिक सौहार्द का केंद्र रही है और इसे विवादों में घसीटना गलत है। सीनियर एडवोकेट एपी सिंह ने महाराणा प्रताप सेना के राजवर्धन सिंह परिहार का पक्ष रखते हुए कोर्ट से मांग की है कि सभी ऐतिहासिक तथ्यों की गहराई से जांच हो।

अब आगे क्या? शहर में अलर्ट

कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब अगली तारीख पर कोर्ट यह तय करेगा कि किन-किन लोगों को इस मुकदमे में शामिल किया जाएगा और किन की अर्जी कचरे के डिब्बे में जाएगी। अजमेर प्रशासन भी अलर्ट पर है और सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि कोई अफवाह न फैले।

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