Rajasthan News: राजस्थान के श्रीगंगानगर में नहरी पानी के मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद अब जयपुर के गलियारों तक पहुंच गया है। विधायक जयदीप बिहानी और AEN जगनलाल बैरवा के बीच हुई हाथापाई ने अब सियासी दंगल का रूप ले लिया है। आलम यह है कि एक तरफ अधिकारी अपनी चोटें दिखा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर चल रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए भजनलाल सरकार ने तुरंत एक्शन लिया है और LSG के प्रमुख सचिव रवि जैन की अगुवाई में कमेटी ने जांच शुरू कर दी है।

अधिकारी पिट रहे हैं, सरकार कहां है?

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। जूली ने सवाल उठाया कि जब सूबे में विधायक और अधिकारी दोनों ही सुरक्षित नहीं हैं और सड़कों पर पिट रहे हैं, तो प्रशासन आखिर कर क्या रहा है? उन्होंने साफ कहा कि इस मामले की जांच किसी प्रशासनिक अधिकारी से नहीं, बल्कि सीनियर जजों की कमेटी से कराई जानी चाहिए। जूली का कहना है कि शुरुआत में खबर कुछ और थी, लेकिन जब AEN की चोटें सामने आईं, तो हकीकत कुछ और ही निकली।

कांग्रेस न दे भड़काऊ बयान- मदन राठौड़

वहीं, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस नेताओं को नसीहत देते हुए कहा है कि वे मामले को तूल न दें। राठौड़ ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत और टीकाराम जूली जैसे नेता 24 घंटे के भीतर अपने बयानों से पलट रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इस विवाद का सम्मानजनक समाधान निकालेगी ताकि विधायक और अधिकारी दोनों का मान-सम्मान बरकरार रहे। राठौड़ ने दो-टूक कहा कि कहीं कोई बात हुई है तो उसे संभाल लिया जाएगा, लेकिन कांग्रेस इसमें भड़काऊ राजनीति न करे।

खाचरियावास के गंभीर आरोप, पुलिस पर भी सवाल

पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस पूरी तरह से विधायक के दबाव में काम कर रही है और पीड़ित अधिकारियों पर ही दबाव बनाया जा रहा है। खाचरियावास ने कहा कि AEN के शरीर पर मौजूद निशान गवाही दे रहे हैं कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट हुई है। अगर जनप्रतिनिधि ही कानून हाथ में लेंगे, तो राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

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