असम में विधानसभा चुनाव हो चुका है. आज राज्य की सियासत के लिए सबसे बड़ा दिन है. आज साफ हो जाएगा कि जनता ने अगले पांच साल के लिए सत्ता की चाबी किसे सौंपी है. राज्य की सभी 126 सीटों पर इस बार एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान हुआ था. असम में अभी तक सामने आए 97 सीटों के शुरुआती रुझानों के मुताबिक बीजेपी गठबंधन 71 सीटों पर आगे है जबकि कांग्रेस गठबंधन 26 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. यानि बीजेपी रुझाने में असम में सरकार बनाने के लिओए जरूरी सत्ता का मैजिक नंबर हासिल कर लिया है.
बात करें राज्य के हाई प्रोफाइल सीटों की तो असम में जोरहाट विधानसभा सीट पर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई लगातार बढ़त बनाए हुए हैं. वहीं जालुकबारी की तो यहां सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की एकतरफा बढ़त जारी है. इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है और हिमंत बिस्वा सरमा यहां से 25 साल से विधायक हैं, लेकिन इस बार नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.
असम में सरकार बदलने वाली है: देवव्रत सैकिया
असम के नाजिरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार देवव्रत सैकिया ने कहा, ‘असम में सरकार बदलने वाली है. असम में अच्छे दिनों का वादा करके भाजपा ने लोगों से वोट लिए लेकिन बेरोजगार युवाओं, किसानों, महिला सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया.’
सत्ता का ‘मैजिक नंबर’, 64 सीटों की जंग
आपको बता दें कि असम की सत्ता पर काबिज होने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है. असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं. नियम के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए सदन में बहुमत सिद्ध करना होता है. बहुमत के लिए कुल सीटों के आधे से कम से कम एक अधिक सीट की जरूरत होती है.
यानी, जिस भी दल या गठबंधन के पास 64 या उससे अधिक विधायक होंगे, वह राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है. यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो इसे त्रिशंकु विधानसभा कहा जाता है, जहां चुनाव के बाद गठबंधन की भूमिका अहम हो जाती है.
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