अंबाला, अनिल शर्मा. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, अम्बाला के उप कृषि निदेशक डॉ. जसविन्द्र सिंह ने बताया कि किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसानों के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है। फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति खत्म हो जाती है और मिट्टी में मौजूद लाभकारी कीट भी नष्ट हो जाते हैं। किसानों से अपील की जा रही है कि वे अपने आसपास गेहूं के अवशेष बिल्कुल भी न जलाएं।

उन्होंने बताया कि वातावरण को प्रदूषण से बचाने और बच्चों व बुजुर्गों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोकने के लिए गेहूं की कटाई के बाद बचे अवशेष जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। अवशेष जलाने के बजाय किसान स्ट्रॉ रीपर, रीपर बाइंडर, हैपी सीडर, स्ट्रॉ बेलर और रोटावेटर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग कर अवशेषों को खेत में ही दबाएं।


नियमों के अनुसार कृषि अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। यदि कोई किसान अवशेष जलाते हुए पाया जाता है तो उसे निम्नानुसार जुर्माना देना होगा:

  • 2 एकड़ तक अवशेष जलाने पर: ₹5,000
  • 2 से 5 एकड़ तक: ₹10,000
  • 5 एकड़ से अधिक: ₹30,000
    इसके अलावा भारतीय दंड संहिता और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है और रेड एंट्री की कार्रवाई भी होगी।उपायुक्त अजय तोमर के निर्देशानुसार निगरानी के लिए गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, अम्बाला ने सभी किसानों से अपील की है कि वे गेहूं के अवशेषों में आग न लगाएं, ताकि पर्यावरण प्रदूषण रोका जा सके और खेतों की उर्वरता बनी रहे।