राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश में मंत्री दर्जा प्राप्त नेताओं को नगरीय निकाय जिताना होंगे! अगले निकाय चुनावों में पार्टी को जीत दिलानी होगी। त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव में भी भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों को जिताना होगा। पार्टी पदाधिरी, कार्यकर्ताओं के साथ निगम मंडलों में बैठाए गए नेताओं की भी जवाबदारी तय होगी। संगठन जल्द बैठक लेकर जिम्मेदारी तय करेगा। जिस क्षेत्र का करते हैं प्रतिनिधित्व, वहां की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब तक 60 सरकारी पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां हुई है करीब 30 नियुक्तियां और कतार में 10 प्राधिकरण, 8 निगम सहित अन्य संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियां हुई हैं। आयोग और बोर्ड के पदाधिकारी इस जिम्मेदारी से मुक्त रहेंगे।

अब तक इन नेताओं को मिले पद

विशेष क्षेत्र प्राधिकरण ग्वालियर- अध्यक्ष अशोक शर्मा
उपाध्यक्ष हरीश मेवाफरोश.
ग्वालियर विकास प्राधिकरण- अध्यक्ष मधुसूदन भदौरिया, उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता, वेद प्रकाश शिवहरे.
अमरकंटक विकास प्राधिकरण- अध्यक्ष राजेंद्र भारती.
ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण- अध्यक्ष अशोक जादौन, उपाध्यक्ष उदय वीर सिंह गुर्जर.
रतलाम विकास प्राधिकरण- अध्यक्ष मनोहर पोरवाल,
उपाध्यक्ष गोविंद काकर्णी और प्रवीण सोनी.
सदस्य राजेंद्र सिंह गोयल, राजेंद्र मौर्य, धीरज व्यास, राखी व्यास
मध्य प्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण भोपाल- अध्यक्ष विनोद गोटिया,
मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय सहरिया विकास प्राधिकरण- अध्यक्ष गुड्डी आदिवासी.
जबलपुर विकास प्राधिकरण- अध्यक्ष संदीप जैन, उपाध्यक्ष प्रशांत केसरवानी।
मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल- अध्यक्ष ओम जैन
विंध्य विकास प्राधिकरण- अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति. उपाध्यक्ष डॉ अजय सिंह
उज्जैन विकास प्राधिकरण- अध्यक्ष रविन्द्र सोलंकी.
उपाध्यक्ष मुकेश यादव, रवि वर्मा.
सदस्य विजय अग्रवाल, अमित श्रीवास्तव, रामचंद्र शर्मा, सुशीला जाटवा, दुर्गा केवट.
मध्य प्रदेश युवा आयोग- अध्यक्ष प्रवीण शर्मा.

मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम

अध्यक्ष रामनिवास रावत.
उपाध्यक्ष रामोहन बघेल.
मध्य प्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम- अध्यक्ष केशव सिंह बघेल.
मध्य प्रदेश राज्य सहकारी बैंक मर्यादित विकास निगम- प्रशासक महेंद्र सिंह यादव.

कांग्रेस- आयातित नेताओं से पार्टी को भर लिया

मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने कहा- बीजेपी ने आयातित नेताओं से पार्टी को भर लिया है। तीन साल बाद नियक्तियां कीं और शर्त भी रख दी। एक तरह से जिताने का वादा करवा लिया है। खुद जीतने वाले होते तो विधानसभा का टिकट मांग रहे होते। दरी बिछाने वाले कार्यकर्ता बीजेपी से दूर जा चुके हैं।

बीजेपी- जिम्मेदारी देने के लिए नियुक्तियां

बीजेपी प्रवक्ता धैर्यवर्धन शर्मा ने कहा- कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के लिए नियुक्तियां की जाती हैं। जिम्मेदारी बढ़ने पर पार्टी के प्रति उनका समर्पण और जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। सभी कार्यकर्ता चुनावी में महती जिम्मेदारी निभाते ही हैं। पार्टी तो यह चाहती है कि जिन्हें जिम्मेदारी मिली है उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाए।

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