Dharm Desk- कालाष्टमी का दिन बेहद खास होता है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आता है. यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है. जिन्हें भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप माना गया है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं, भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. अगर आप जीवन में चल रही परेशानियों, डर या नकारात्मकता से परेशान हैं तो कालाष्टमी की यह रात आपके लिए विशेष अवसर हो सकती है. सच्चे मन से की गई पूजा निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव ला सकती है.

निशिता काल की पूजा का मुहूर्त

कालाष्टमी पर मध्यरात्रि यानी निशिता काल की पूजा का विशेष महत्व होता है. 9 मई की रात लगभग 11:45 बजे से 12:35 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जा रहा है. इस दौरान की गई पूजा को अत्यंत फल दायी है. क्योंकि यह समय काल भैरव की आराधना के लिए सर्वोत्तम होता है.

ऐसे करें रात की पूजा

रात के शुभ मुहूर्त में स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को शुद्ध करें. इसके बाद भगवान काल भैरव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. दीपक में सरसों का तेल उपयोग करना शुभ माना जाता है, फिर काले तिल, उड़द दाल, नारियल और फूल अर्पित करें.

पूजा के दौरान ओम कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करें. भैरव चालीसा का पाठ करें. अगर संभव हो तो कुत्ते को भोजन अवश्य कराएं, क्योंकि काल भैरव का वाहन है.

किस्मत बदल सकते हैं ये खास उपाय

कालाष्टमी की रात सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत प्रभावी उपाय माना है. यह उपाय न केवल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है. बल्कि शनि दोष को भी शांत करने में मदद करता है. दीप जलाते समय पूरी श्रद्धा से भगवान का स्मरण करें और अपने कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करें.

इस दिन पूजा का महत्व

इस दिन की गई पूजा से शत्रु बाधा, रोग और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है. साथ ही राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव भी कम होते है. काल भैरव की कृपा से जीवन में सुरक्षा, स्थिरता और सुख-समृद्धि आती है.