राकेश कथूरिया, कैथल। सरकारी स्कूलों में बच्चों के आत्मविश्वास और कक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए शुरू किए गए ‘स्टंबल लैब प्रोजेक्ट’ के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। डीसी अपराजिता के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट से अब तक 25 हजार से अधिक विद्यार्थी जुड़ चुके हैं। आकलन के अनुसार, कक्षा की गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी करीब 62 प्रतिशत बढ़ी है। वहीं स्कूलों में विद्यार्थियों की हाजिरी में भी 11 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

असफलता के डर से बाहर निकालना है उद्देश्य

‘स्टंबल’ का अर्थ ठोकर खाना है। प्रोजेक्ट का मकसद बच्चों को असफलता से डरने के बजाय उससे सीखने और दोबारा कोशिश करने के लिए तैयार करना है।

अक्सर बच्चे किसी काम में पहली बार असफल होने के बाद दोबारा कोशिश करने से बचते हैं। स्टंबल लैब में उन्हें ऐसी गतिविधियों में शामिल किया जाता है, जिनमें असफल होने की संभावना रहती है। असफल होने पर बच्चों को निराश करने के बजाय दोबारा प्रयास के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

इसका असर बच्चों के व्यवहार में भी दिखाई दे रहा है। वे अब कक्षा में ज्यादा सवाल पूछ रहे हैं और गतिविधियों में खुलकर हिस्सा ले रहे हैं। बार-बार कोशिश करने का मौका मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है। इसका असर पढ़ाई में उनकी रुचि पर भी पड़ रहा है।

320 से अधिक सरकारी स्कूल जुड़े

डीसी अपराजिता ने बताया कि स्टंबल लैब प्रोजेक्ट के तहत जिले के 320 से अधिक सरकारी स्कूलों को जोड़ा गया है। अब तक 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थी इसका लाभ ले चुके हैं।

प्रोजेक्ट के तहत 1,650 से अधिक शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। स्कूलों में 150 से अधिक गतिविधियां कराई गई हैं। शिक्षकों के लिए भी 25 से ज्यादा प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।

पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी

प्रोजेक्ट के परिणामों को देखते हुए इसे पूरे हरियाणा में लागू करने की घोषणा शिक्षामंत्री की ओर से की गई है। विभाग स्तर पर इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की कक्षा में भागीदारी बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए उनमें सवाल पूछने, गलतियों से सीखने और बिना डर दोबारा प्रयास करने की आदत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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