Automobile Desk : देश का ऑटोमोबाइल बाजार एक बार फिर नए पंख फैलाने की तैयारी में है। हाल ही में आई ICICI डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारतीय ऑटो इंडस्ट्री की ग्रोथ काफी शानदार रहने की उम्मीद है। इस पूरे उभार के केंद्र में दोपहिया (Two-Wheelers) और पैसेंजर वाहन (Passenger Vehicles) रहने वाले हैं। ऐसा अनुमान है कि इन दोनों ही सेक्टर्स में बिक्री की दर 8 से 10 फीसदी के बीच दर्ज की जा सकती है। हाल के बिक्री आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि बाजार में ग्राहकों की मांग तेजी से लौट रही है।

अगस्त 2026 के बिक्री आंकड़े इंडस्ट्री की इस मजबूत बुनियाद को साफ दर्शाते हैं। वाहन रजिस्ट्रेशन पोर्टल ‘वाहन’ (VAHAN) पर दर्ज डेटा बताता है कि बीते महीने लगभग 24 लाख गाड़ियों का पंजीकरण हुआ। पिछले साल अगस्त के 20.7 लाख के मुकाबले यह सीधा 16 प्रतिशत का उछाल है। ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी 2.0 (GST 2.0) के लागू होने के बाद से बाजार को जो फायदा मिला है, उसने मांग को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई है। शोरूम पर ग्राहकों की आवाजाही और रिटेल खरीदारी लगातार बढ़ रही है।
दोपहिया गाड़ियों की बात करें तो बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर जैसी दिग्गज कंपनियों ने एक्सपोर्ट और घरेलू बाजार दोनों जगह शानदार प्रदर्शन किया है। अगस्त के महीने में बजाज ऑटो ने 30% की सालाना बढ़त हासिल की, जिसमें इसके विदेशी निर्यात (Export) में 53 फीसदी की भारी तेजी देखी गई। इसी तरह, टीवीएस मोटर ने भी 5.9 लाख यूनिट्स की बिक्री के साथ लगभग 20.5% का इजाफा दर्ज किया। युवाओं की पसंदीदा ब्रांड रॉयल एनफील्ड (आयशर मोटर्स) की गाड़ियों की मांग में भी 11 प्रतिशत का सुधार देखा गया और कंपनी ने 1.26 लाख यूनिट्स बेचीं।
पैसेंजर व्हीकल यानी कारों के बाजार में टाटा मोटर्स का प्रदर्शन सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला रहा। हालांकि पिछले आंकड़ों के आधार पर कंपनी का बेस थोड़ा कम था, लेकिन इस बार उसने 56% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ 68,000 गाड़ियां डिलीवर कीं। इसमें भी सबसे खास बात यह रही कि टाटा की इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) की मांग में 94 फीसदी का जबरदस्त उछाल आया। दूसरी तरफ, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने 2.16 लाख यूनिट्स की कुल बिक्री के साथ 21% की ग्रोथ हासिल की, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 50 प्रतिशत की बढ़त बनाकर करीब 59,000 गाड़ियां बेचीं।
भारी और व्यावसायिक वाहनों (Commercial Vehicles) के क्षेत्र में भी काफी समय से रुकी हुई मांग अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटती दिख रही है। देश में बुनियादी ढांचे के निर्माण, सरकारी कैपेक्स और पुरानी गाड़ियों को बदलने की नीति (Scrappage) के चलते टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में 49 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। अशोक लेलैंड ने 38% और वीईसीवी (VECV) ने 18% की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। बसों की खरीद और मध्यम-भारी ट्रकों की आवाजाही बढ़ने से कमर्शियल सेक्टर को नई दिशा मिल रही है।
हालांकि, ऑटो इंडस्ट्री के सभी हिस्से एक समान रफ्तार से नहीं भाग रहे हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़ा ट्रैक्टर सेगमेंट फिलहाल थोड़ा सुस्त नजर आ रहा है। अगस्त में एस्कॉर्ट्स कुबोटा की बिक्री में 19% और महिंद्रा के ट्रैक्टरों में केवल 5% की बढ़त देखी गई। जानकारों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में ट्रैक्टरों की रिकॉर्ड बिक्री हुई थी, जिसके कारण बेस काफी ऊंचा है। इसके साथ ही इस साल मानसून का औसतन 90 फीसदी रहने का अनुमान भी ग्रामीण मांग को थोड़ा सीमित कर सकता है। फिर भी, कुल मिलाकर कार और बाइक की मजबूत बिक्री पूरे ऑटो सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।



