Business Desk – Crude Oil Price Today : कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को गिरावट दर्ज की गई। सुबह 8:50 बजे ब्रेंट क्रूड का भाव 1.10% गिरकर 114.538 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल WTI की कीमत 0.84% की गिरावट के बाद 100.901 डॉलर प्रति बैरल रही।

पिछले कई दिनों से पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही थी। अब सऊदी अरब की ओर से ईरान के नेताओं के साथ बातचीत किए जाने से तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
आज कच्चे तेल की कीमतों में कितना बदलाव आया?
27 अक्टूबर की सुबह उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 1.10% फिसलकर 114.538 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI क्रूड 0.84% गिरकर 100.901 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
हालांकि, हालिया गिरावट के बावजूद तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बीते एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% की तेजी आने की बात कही गई है।
सऊदी अरब-ईरान बातचीत से क्यों बदला बाजार का रुख?
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी वजह से युद्ध या सैन्य कार्रवाई का खतरा बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं।
अब सऊदी अरब के रक्षा मंत्री की ईरान के नेताओं के साथ बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों के साथ मिलकर भी क्षेत्र में तनाव घटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन कूटनीतिक कोशिशों का मकसद संभावित सैन्य टकराव को रोकना है।
अमेरिका-ईरान तनाव का तेल की कीमतों पर क्या असर?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयास भी चल रहे हैं। इससे पहले अमेरिका की ओर से ईरान पर नए हमलों की आशंका जताई जा रही थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं।
ऐसे में बातचीत शुरू होने की खबरों से बाजार में अनिश्चितता कुछ कम हुई है। हालांकि, जब तक दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
भारत को कच्चे तेल की गिरती कीमतों से क्या फायदा होगा?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने से देश के तेल आयात का खर्च कम हो सकता है। इससे महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घटाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता होने का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तुरंत या उसी अनुपात में दिखे, यह जरूरी नहीं है। रुपये-डॉलर की विनिमय दर, टैक्स और दूसरी लागतें भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं।
आगे सस्ता होगा कच्चा तेल या फिर आएगा उछाल?
फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन पश्चिम एशिया का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है, तो तेल उत्पादन और परिवहन प्रभावित होने की आशंका से कीमतें फिर बढ़ सकती हैं।
दूसरी ओर, बातचीत आगे बढ़ने और तनाव कम होने पर तेल की कीमतों को राहत मिल सकती है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

