Bikaner Khara Air Pollution NGT Case: राजस्थान के बीकानेर के खारा गांव और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में वायु प्रदूषण और उससे लोगों की सेहत पर पड़ रहे असर को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने सख्ती दिखाई है। 26 अक्टूबर को भोपाल स्थित NGT की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ में हुई सुनवाई के दौरान राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने बताया कि प्रदूषण फैलाने वाली 21 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं।

वहीं, चिकित्सा विभाग के सर्वे में 694 घरों के निरीक्षण के दौरान 121 लोगों में श्वसन संबंधी बीमारियों के लक्षण सामने आने की जानकारी दी गई। न्यायाधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल को कार्रवाई आगे बढ़ाकर तीन सप्ताह में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
21 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के नोटिस
सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से बताया गया कि खारा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में 21 इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं। NGT ने मंडल को कार्रवाई आगे बढ़ाने और तीन सप्ताह के भीतर अनुपालना रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए।
यह मामला क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण और उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर उठाई गई शिकायत के बाद न्यायाधिकरण के संज्ञान में आया था। अब अगली सुनवाई में कार्रवाई की स्थिति और संबंधित पक्षों के जवाब अहम होंगे।
694 घरों के सर्वे में 121 लोगों में मिले लक्षण
सुनवाई में चिकित्सा विभाग के सर्वेक्षण का विवरण भी सामने आया। इसके अनुसार, 694 घरों के सर्वे के दौरान 121 लोगों में श्वसन संबंधी बीमारियों के लक्षण पाए गए। प्रदूषण के कारण लोगों की सेहत पर पड़ रहे संभावित असर को लेकर मामले में चिंता जताई गई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन लक्षणों और औद्योगिक प्रदूषण के बीच चिकित्सकीय रूप से स्थापित संबंध का विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में सर्वे के निष्कर्षों और क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति की आगे जांच महत्वपूर्ण रहेगी।
पौधरोपण के साथ पौधों को बचाने पर भी जोर
NGT ने क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पौधरोपण कराने के निर्देश भी दिए। न्यायाधिकरण ने कहा कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा और देखभाल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, पौधों के जीवित रहने और उनके संरक्षण से जुड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद NGT ने लिया था संज्ञान
यह मामला राम सिंह खारा के पत्र के आधार पर NGT की ओर से स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किया गया था। पत्र में 12 दिसंबर 2025 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित उस खबर का उल्लेख था, जिसमें औद्योगिक प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों और कुछ परिवारों द्वारा बच्चों को स्कूल नहीं भेजने के फैसले का जिक्र किया गया था।
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता ने भी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य पर उसके प्रतिकूल प्रभाव की आशंका जताई। न्यायाधिकरण के समक्ष अब प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कदमों और संबंधित पक्षों के जवाब का मामला है।
अगली सुनवाई 18 दिसंबर को
भोपाल स्थित NGT की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने 26 अक्टूबर को मामले की सुनवाई की। जवाब दाखिल नहीं करने वाले प्रतिवादियों को पीठ ने तीन सप्ताह का समय दिया। वहीं, खारा औद्योगिक क्षेत्र यानी ग्रोथ सेंटर की औद्योगिक इकाइयों की ओर से अधिवक्ता ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा, जिस पर दो सप्ताह की मोहलत दी गई। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।
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