मानसा में युवक की मौत और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल; पंजाब के मुख्य सचिव और DGP से दो सप्ताह में मांगी गई एक्शन टेकन रिपोर्ट

चंडीगढ़। पंजाब के मानसा जिले में दलजीत सिंह की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। भम्मे कलां गांव के इस युवक की मौत और उसके बाद परिवार के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) ने पंजाब सरकार और संबंधित प्रशासन के सामने सवाल खड़े किए हैं। शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए दोनों आयोगों ने नोटिस जारी किए हैं। इस घटनाक्रम के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और पुलिस की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।

दो राष्ट्रीय आयोगों की एंट्री, सरकार से मांगा जवाब

मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पीठ, जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियांक कानूनगो कर रहे हैं, ने पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को जांच कर दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

आयोग के सामने रखी गई शिकायत में दलजीत सिंह की मौत की परिस्थितियों और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने प्रथम दृष्टया इसे मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है। मामले की जानकारी आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव को भी भेजी गई है।

दलजीत सिंह की मौत के बाद क्यों भड़का विवाद?

शिकायतकर्ता हरमनदेव सिंह मेहता के आरोपों के मुताबिक, मानसा जिले के भम्मे कलां गांव के निवासी दलजीत सिंह की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। शिकायत में मौत के संभावित रूप से कथित ड्रग्स ओवरडोज से जुड़े होने की आशंका भी जताई गई है।

हालांकि, मौत की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। परिवार और समर्थकों ने घटना की निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही की मांग करते हुए रामदित्तेवाला चौक के पास विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की। इसके बाद मामला और तनावपूर्ण हो गया।

शव को कब्जे में लेने और हिरासत के आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने मृतक के शव को अपने कब्जे में ले लिया और परिवार के सदस्यों को रोकने का प्रयास किया। इसे लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होने का दावा किया गया है।

परिवार की ओर से प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किए जाने और उन्हें हिरासत में लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक के पिता को भी हिरासत में लिया गया था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटनाक्रम की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण होगी।

पुलिस ने क्या कहा? सामने आया दूसरा पक्ष

दूसरी ओर, पुलिस विभाग ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।

इस तरह मामले में परिवार के आरोपों और पुलिस के दावे सामने हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि दलजीत सिंह की मौत किन परिस्थितियों में हुई, प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या घटनाक्रम रहा और पुलिस की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी जारी किया नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी औपचारिक नोटिस जारी किया है। पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता हरदेव सिंह उभा ने नई दिल्ली में आयोग के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल से मुलाकात कर मामले को उठाया।

उभा ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। आयोग के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल ने भी बयान में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने नोटिस जारी किया है और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने को कहा है।

अब जांच और जवाबदेही पर टिकी नजरें

दलजीत सिंह की संदिग्ध मौत से जुड़ा यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहा। दो राष्ट्रीय आयोगों के हस्तक्षेप के बाद पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन की जांच तथा आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

सबसे अहम सवाल यही हैं कि युवक की मौत की वास्तविक वजह क्या थी, विरोध प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में क्या सामने आता है। आयोगों के समक्ष प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।