Dharm Desk : दिवाली के पांच दिवसीय महापर्व में नरक चतुर्दशी का बहुत महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। छोटी दिवाली 7 नवंबर शनिवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:48 से शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 11: 28 तक रहेगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा यमराज के निमित्त दीपदान और घर की शुद्धि से जुड़े कार्य किए जाते है।
इसकी एक पौराणिक कथा भी है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर हजारों बंदियों को मुक्त कराया था। छोटी दिवाली की रात घर में दीपक जलाने के साथ पांच विशेष सामग्रियों की धूनी देने से नाकारात्मकता दूर होती है। इस प्रयोग में काली राई, पीली सरसों, काले तिल, खड़ा नमक और कपूर का उपयोग किया जाता है।
1.काली राई
इसका उपयोग नजर दोष और नकारात्मक प्रभावों से बचाव के पारंपरिक प्रयोगों में किया जाता है।
2.पीली सरसों
घर की शुद्धि और बाधाओं से मुक्ति के लिए किए जाने वाले धार्मिक कार्यों में इसका उपयोग होता है।
3.खड़ा नमक
नमक को शुद्धता का प्रतीक मानकर पारंपरिक धार्मिक प्रयोगों में शामिल किया जाता है।

4.काले तिल
काले तिल का संबंध शनिदेव और पितरों से है। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में इनका विशेष स्थान है।
5.कपूर
पूजा-पाठ में कपूर जलाने की परंपरा है। आरती और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका विशेष उपयोग किया जाता है।
छोटी दिवाली की रात मिट्टी या लोहे के पात्र में काली राई, पीली सरसों, खड़ा नमक और काले तिल थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिला लें। इसके बाद कपूर जलाकर इस मिश्रण से घर के मुख्य द्वार से शुरुआत करते हुए सभी हिस्सों में धूनी दें। इस प्रयोग के पीछे घर को बुरी नजर और नकारात्मक प्रभावों से बचाने के साथ शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति और खुशहाली के लिए भी यह परंपरा निभाई जाती है। धूनी देते समय आग से सावधानी बरतें और बंद कमरे में धुआं न करें।

