रेलवे पुल से नेहरू पार्क तक प्रस्तावित ब्रिज का फिजिबिलिटी सर्वे पूरा, 11 जगह बनेंगे मेडिकल, टॉयलेट और पुलिस सहायता केंद्र
देवघर। बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों कांवरियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित एलिवेटेड फुटओवरब्रिज परियोजना पर काम तेज हो गया है। गुरुवार को पथ निर्माण विभाग (PWD) और स्पर्श कंसल्टेंट की संयुक्त टीम ने रेलवे पुल से नेहरू पार्क तक प्रस्तावित मार्ग का फिजिबिलिटी सर्वे किया। प्रारंभिक सर्वे में रेलवे पुल की संरचनात्मक स्थिति को देखते हुए फुटओवरब्रिज का निर्माण रेलवे पुल के आगे से शुरू करने पर सहमति बनी है।
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। प्रस्तावित फुटओवरब्रिज की चौड़ाई 7 मीटर होगी, जिसमें 5 मीटर चौड़ा पैदल मार्ग केवल कांवरियों के लिए रहेगा, जबकि शेष 2 मीटर हिस्सा सुरक्षा रेलिंग, रखरखाव और आपातकालीन सेवाओं के उपयोग के लिए होगा।
रेलवे पुल से नेहरू पार्क तक बनेगा मार्ग
प्रस्तावित रूट के अनुसार एलिवेटेड फुटओवरब्रिज रेलवे पुल के आगे से शुरू होकर रांगा मोड़, बिजली पासी चौक, दर्शनियां मोड़, बीएन झा पथ, पंडित शिवराम झा चौक और मानसरोवर हनुमान मंदिर होते हुए सीधे नेहरू पार्क तक पहुंचेगा। इससे कांवरिये सुरक्षित रूप से शिवगंगा पहुंच सकेंगे और स्नान के बाद बिना यातायात बाधा के दर्शन के लिए कतार में शामिल हो सकेंगे।
11 स्थानों पर मिलेंगी जरूरी सुविधाएं
कांवरियों की सुविधा के लिए फुटओवरब्रिज पर 11 स्थानों पर टॉयलेट, मेडिकल सहायता केंद्र और पुलिस कैंप बनाए जाएंगे। रेलवे पुल, रांगा मोड़ और दर्शनियां मोड़ प्रमुख केंद्र होंगे, जबकि अन्य सुविधाएं बीएन झा पथ के ऊपर विकसित की जाएंगी। इसके अलावा आठ स्थानों पर रैंप और सीढ़ियां भी बनाई जाएंगी, जिनका उपयोग पुलिस, प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं करेंगी।
दो मार्ग योजना से बाहर
फिजिबिलिटी सर्वे में पाया गया कि प्रणय वाटिका मार्ग और विश्वनाथ मिश्र लेन (वीआईपी लॉज मार्ग) की चौड़ाई पर्याप्त नहीं है। इसलिए इन दोनों हिस्सों को परियोजना से बाहर रखते हुए नया रूट हिंदी विद्यापीठ से शिवराम झा चौक और मानसरोवर के किनारे होते हुए नेहरू पार्क तक प्रस्तावित किया गया है। सर्वे के अनुसार परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर मकान तोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
दो माह में तैयार होगी रिपोर्ट
PWD के कार्यपालक अभियंता एम.के. महतो ने बताया कि फिजिबिलिटी सर्वे के आधार पर दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। इसके बाद परियोजना का डिजाइन और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। परियोजना पूरी होने के बाद श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुगम होने की उम्मीद है।


