अजयारविंद नामदेव, शहडोल। अन्नदाता को सम्मान और फसल का समय पर भुगतान देने के सरकारी दावों के बीच शहडोल जिले से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां 80 साल की उम्र में खेतों में खून-पसीना बहाकर उगाई गई धान तो खरीदी केंद्र ने ले ली, लेकिन लाखों रुपये का भुगतान आज तक नहीं हुआ। मेहनत की कमाई की आस में किसान अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटता रहा और इसी बीच इलाज के अभाव में उसके जवान बेटे की मौत हो गई। अब बुजुर्ग किसान न्याय और अपने हक की रकम के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। यह हृदय विदारक मामला जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित अमझोर के रामसोहरा धान खरीदी केंद्र का है।
जयसिंहनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गांधीय निवासी राम प्रताप कंवर बुजुर्ग किसान ने उम्र के इस पड़ाव में भी लगभग 45 रकबा जमीन पर खेती कर जनवरी माह में 1169 बोरी धान रामसोहरा धान खरीदी केंद्र में जमा कराया था। किसान के मुताबिक धान खरीदी केंद्र प्रभारी मदन मोहन पांडेय ने धान तो तौल लिया, लेकिन उसे ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया। यही वजह है कि करीब 10 लाख रुपये का भुगतान आज तक अटका हुआ है।
बुजुर्ग किसान का कहना है कि उसने खून-पसीना बहाकर खेती की थी ताकि परिवार का सहारा बन सके, लेकिन भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक संकट इतना बढ़ गया कि उसके बीमार बेटे का समुचित इलाज नहीं हो सका। इलाज के अभाव में 4 जून को बेटे की मौत हो गई, बेटे को खोने के बाद अब बुजुर्ग किसान न्याय और अपनी मेहनत की रकम पाने के लिए 50 किलोमीटर से अधिक सफर तय कर जिला मुख्यालय में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है।
वहीं पूरे मामले में सहायक आपूर्ति अधिकारी प्रदीप द्विवेदी ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। प्रारंभिक जांच में किसान की आईडी पावती जारी नहीं होने की बात सामने आई है। मामले की जांच कराई जा रही है और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

