सोनीपत। सोनीपत में आज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के दर्शन को भक्त उमड़ पड़े। भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी ने हिंदू संस्कृति की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा में घर की पहली रोटी गाय के लिए निकलती है, जो गांव और संस्कृति की रक्षा का प्रतीक है, लेकिन आज संस्कृति बदल रही है। पहले गाय को माता कहा जाता था, अब राष्ट्रीय पशु। “गाय को पशु कहना अस्वीकार्य है। सरकारें करोड़ों का बजट गौशालाओं पर खर्च करती हैं, लेकिन पहले माता का दर्जा दो। हमारी सभ्यता में गाय सदा माता रही। अंग्रेज आए तो इसे पशुओं की श्रेणी में धकेल दिया। आज तक कोई सरकार या पार्टी ने गाय को माता का दर्जा नहीं दिलाया।”

स्वामी जी ने चिंता जताई कि अभी भी अंग्रेजी मानसिकता वाली सरकारें शासन कर रही हैं। “वोट लेकर आपकी माता को बोटी-बोटी काटकर पैकेट बंद एक्सपोर्ट कर रही हैं। यह सहन नहीं है। भारत को विकसित बनाने का दावा करते हैं, लेकिन संस्कृति मर रही है। विकास तभी संभव जब संस्कृति जिंदा रहे।”

अयोध्या राम मंदिर का जिक्र करते हुए स्वामी जी ने कहा, “दो-तीन दिन पहले रामलला मूर्ति के सामने ज्योति स्वरूप स्थापित किया गया। कहा जा रहा है पवित्रता के लिए। हमारी संस्कृति में पवित्रता घी-तेल के दीये से बनती है। लेकिन यहां प्लास्टिक का गुंबद बनाकर उस पर लाइट पैक लगाई, जो जलता दिखे। जिस दीये को बाहरी प्रकाश चाहिए, वह पवित्रता कैसे बनाए रखेगा? यह पाश्चात्य प्रभाव है।” भक्तों ने तालियां बजाकर समर्थन किया। स्वामी जी ने अपील की कि गाय को माता घोषित करो, संस्कृति बचाओ।