देश के प्रख्यात न्यूरोसर्जन और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. अशोक कुमार महापात्र का निधन हो गया है। उनके निधन से चिकित्सा जगत में शोक की लहर है। उन्होंने अपने लंबे चिकित्सा करियर में हजारों मरीजों को नया जीवन दिया और जटिल न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। डॉ. महापात्र उन चिकित्सकों में शामिल थे, जिन्होंने गंभीर और जटिल मस्तिष्क संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन किए और ऐसे मरीजों को भी जीवन की नई उम्मीद दी, जिनके ठीक होने की संभावना बेहद कम मानी जाती थी। डॉ. अशोक कुमार महापात्र ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में लंबे समय तक सेवाएं दीं। मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज में उनकी विशेषज्ञता के लिए उन्हें देशभर में पहचान मिली।

न्यूरोसर्जन और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. अशोक कुमार महापात्र का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अंतिम सांस ली। वह यहां न्यूरोलॉजिकल बीमारी का इलाज करा रहे थे। उनके परिवार ने उनके निधन की जानकारी दी है। हालांकि, डॉ. महापात्र किस तरह की न्यूरोलॉजिकल बीमारी से पीड़ित थे, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उनके निधन की खबर से चिकित्सा जगत में शोक की लहर है।

दूसरों के दिमाग की बीमारी का करते थे इलाज

डॉ. अशोक कुमार महापात्र की पहचान सिर्फ एक कुशल न्यूरोसर्जन के रूप में नहीं थी, बल्कि वह ऐसे चिकित्सक थे, जिनके अनुभव और विशेषज्ञता पर मरीजों को गहरा भरोसा था। न्यूरोसर्जरी चिकित्सा का ऐसा जटिल क्षेत्र है, जहां मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों के इलाज में बेहद सावधानी और सटीकता की जरूरत होती है। छोटी सी चूक भी मरीज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण मामलों में डॉ. महापात्र ने अपनी विशेषज्ञता से अलग पहचान बनाई थी। विडंबना देखिए कि जिस चिकित्सा क्षेत्र में उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उसी से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी के कारण उन्हें खुद अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। दूसरों की जिंदगी बचाने और उन्हें नई उम्मीद देने वाले इस डॉक्टर का इलाज दिल्ली के AIIMS में चल रहा था। लेकिन तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि इस घटना को इस रूप में देखना उचित नहीं होगा कि डॉ. महापात्र अपनी बीमारी पहचान नहीं पाए या उसका इलाज नहीं कर सके। दरअसल, उन्हें कौन सी न्यूरोलॉजिकल बीमारी थी, इसकी विस्तृत जानकारी परिवार की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है।

सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों जग्गा-कालिया को किया था अलग

डॉ. अशोक कुमार महापात्र के चिकित्सा करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में साल 2017 का वह जटिल ऑपरेशन शामिल है, जिसने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उन्होंने सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों जग्गा और कालिया को अलग करने वाली सर्जरी में अहम भूमिका निभाई थी। करीब 16 घंटे तक चले इस ऑपरेशन को चिकित्सा विज्ञान की बेहद चुनौतीपूर्ण सर्जरी में गिना गया। दोनों बच्चे क्रेनियोपैगस ट्विन्स थे। यह एक दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें जुड़वां बच्चों की खोपड़ी आपस में जुड़ी होती है। ऐसे बच्चों को अलग करने के लिए मस्तिष्क और उससे जुड़ी संवेदनशील रक्त वाहिकाओं की जटिल सर्जरी करनी पड़ती है।

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों की एक बड़ी टीम ने लंबे समय तक तैयारी की थी। सर्जरी के दौरान दोनों बच्चों को सुरक्षित अलग करना चिकित्सकों के सामने बड़ी चुनौती थी। डॉ. महापात्र इस ऐतिहासिक चिकित्सा प्रयास में प्रमुख भूमिका निभाने वाले विशेषज्ञों में शामिल थे। इस उपलब्धि ने उन्हें देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। यह सर्जरी इस बात का उदाहरण बनी कि चिकित्सा विज्ञान में विशेषज्ञता, धैर्य, बेहतर योजना और टीमवर्क के जरिए बेहद जटिल चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

AIIMS भुवनेश्वर की स्थापना में भी निभाई अहम भूमिका

डॉ. अशोक कुमार महापात्र का योगदान सिर्फ ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं था। चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ संस्थानों के निर्माण और मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। AIIMS भुवनेश्वर की स्थापना और उसे एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित करने में उन्होंने अहम योगदान दिया था। वह संस्थान के पहले निदेशक बने थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, मरीजों के इलाज और शोध से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया। उनका प्रयास संस्थान को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करना था। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र से अपना जुड़ाव बनाए रखा। वह IMS और SUM अस्पताल में मेडिकल साइंसेज के सलाहकार के रूप में जुड़े रहे। इसके अलावा, वर्ष 2020 से 2022 तक उन्होंने SOA विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी भी संभाली। उनका सफर बताता है कि वह सिर्फ एक कुशल न्यूरोसर्जन ही नहीं थे, बल्कि चिकित्सा संस्थानों के निर्माण, मेडिकल शिक्षा और नई पीढ़ी के डॉक्टरों को तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

2024 में मिला था पद्मश्री सम्मान, ओडिशा के नेताओं ने जताया शोक

चिकित्सा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2024 में डॉ. अशोक कुमार महापात्र को पद्मश्री सम्मान से नवाजा था। यह सम्मान उनके लंबे चिकित्सा करियर और स्वास्थ्य सेवाओं में दिए गए योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान थी। उनके निधन पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शोक व्यक्त किया। SOA विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. मनोजरंजन नायक ने भी उनके निधन पर दुख जताया। डॉ. नायक ने डॉ. महापात्र को न्यूरोसर्जरी का दिग्गज बताते हुए कहा कि वह एक महान चिकित्सक होने के साथ-साथ अच्छे मार्गदर्शक भी थे। उन्होंने उनके निधन को चिकित्सा जगत के लिए बड़ी क्षति बताया।

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