आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर में नक्सल हिंसा से बाहर निकलकर सामान्य जिंदगी की ओर लौट रहे पूर्व नक्सलियों की कहानी अब एक नए मोड़ पर पहुंच रही है। इसकी एक तस्वीर तब सामने आई, जब आत्मसमर्पण कर चुके 8 पूर्व नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास की।

खास बात ये है कि परीक्षा देने वाला एक भी परीक्षार्थी फेल नहीं हुआ। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने बचपन में स्कूल छोड़ दिया था और बाद में नक्सली संगठन का हिस्सा बन गए, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद जब उन्हें दोबारा पढ़ने का मौका मिला, तो उन्होंने उम्र और बीते हुए समय की परवाह किए बिना किताब उठाई और परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

समाज सेवा करना चाहती है गीता नरोटे

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली गीता नरोटे ने छटवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। साल 2004 में वह नक्सली संगठन से जुड़ी और करीब दो दशक तक संगठन में रही। संगठन में रहते हुए घायल नक्सलियों के इलाज का काम करने के कारण उन्हें डॉक्टर गीता के नाम से भी जाना गया। 25 अक्टूबर 2025 को आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और 35 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास कर ली। गीता को कुल 347 अंक मिले हैं। अब उनका सपना आगे पढ़ाई कर नर्सिंग की ओर बढ़ने और समाज की सेवा करने का है।

खेती-बाड़ी या कारोबार शुरू करना चाहता है संतोष

दूसरी कहानी संतोष आंचल की है। साल 2008 में संगठन में शामिल हुए संतोष ने 2025 में आत्मसमर्पण किया। घर की परिस्थितियों के कारण वह शुरुआती कक्षाओं के बाद पढ़ाई नहीं कर पाया था, लेकिन संगठन में रहते हुए उसे पढ़ने का मौका मिला। आत्मसमर्पण के बाद उसने फिर से किताबें उठाईं, 10वीं की परीक्षा दी और 308 अंक हासिल किए। अब वह 12वीं की पढ़ाई करना चाहता है और आगे खेती-बाड़ी या अपना कारोबार शुरू करने की सोच रहा है।

मार्च 2024 में रामधर ने किया था सरेंडर

वहीं वीरू यानी रामधर कश्यप की पढ़ाई का सफर भी कई पड़ावों से होकर गुजरा। साल 2009 में संगठन में शामिल होने वाले वीरू ने जेल में रहते हुए चौथी कक्षा की परीक्षा दी थी। मार्च 2024 में वापस लौटने के बाद अधिकारियों की पहल पर उसने ओपन स्कूल की 10वीं परीक्षा की तैयारी की। सुबह से लेकर रात तक पढ़ाई की और 256 अंक हासिल कर सेकंड डिविजन से पास हुआ। अब वह आगे पढ़ाई के साथ खेती-किसानी और अपना काम करने की इच्छा रखता है।

बस्तर के 6, कांकेर और बीजापुर के एक-एक परीक्षार्थी शामिल

दरअसल, आत्मसमर्पण के बाद इन पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सिर्फ सुरक्षा और पुनर्वास तक सीमित प्रयास नहीं किए जा रहे, बल्कि उनकी रुचि के मुताबिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के रास्ते भी खोले जा रहे हैं। बस्तर संभाग में 8 पूर्व नक्सलियों को ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा दिलाई गई और सभी सफल रहे। इनमें बस्तर के 6, कांकेर और बीजापुर के एक-एक परीक्षार्थी शामिल हैं।

अब इनकी आगे की पढ़ाई को लेकर भी मदद की बात कही जा रही है। यानी लंबे समय तक संगठन और जंगल के बीच गुजरा जीवन अब धीरे-धीरे पढ़ाई, रोजगार और अपने भविष्य की योजनाओं की तरफ बढ़ रहा है। इन आठ लोगों की सफलता इस बदलाव की एक ऐसी तस्वीर है, जिसमें बीते हुए जीवन के बजाय आगे की जिंदगी को लेकर तैयारी दिखाई दे रही है।

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