Dharm Desk – वर्तमान समय में शनि का प्रभाव कुछ राशियों पर साफ तरह से देखा जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। जिसमें कुंभ अंतिम चरण मीन दूसरे और मेष पहले चरण में चल रही है। वहीं सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या का असर बना हुआ है, ऐसे में जिन लोगों के जीवन में रुकावटें मानसिक तनाव या आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं ऐसे में उनके लिए पारंपरिक उपायों की ओर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

कुत्ते की सेवा
धार्मिक परंपराओं में कुत्ते को शनिदेव से जुड़ा माना गया है। मान्यता है कि कुत्ते को भोजन कराने से शनि का कठोर प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। यही कारण है कि बहुत से लोग शनिवार या नियमित रूप से कुत्तों को रोटी खिलाने की परंपरा निभाते हैं। इसे केवल उपाय नहीं बल्कि सेवा और करुणा का प्रतीक भी माना जाता है।
जलेबी और मीठी रोटी का महत्व
कुछ परंपराओं में कुत्तों को मीठा खिलाने का वाइष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि सात दिनों के अंदर सवा किलो जबीले खिलाने से सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा मीठी रोटी या तेल लगी रोटी भी कुत्तों को खलाई जाती है जिसे शनि के साथ-साथ राहु-केतु से जुड़े प्रभावों को शांत करने वाला माना जाता है।
राहु-केतु और कुत्ते का संबंध
ज्योतिषीय दृष्टि से कुत्ते को केतु का प्रतीक माना गया है। इसलिए कुत्ते की सेवा करने या उसे घर में पालने से केतु के नकारात्मक परभाव कम होने की बात कही जाती है। पितृ शांति के लिए भी कुत्तों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भैरव उपासना से जुड़ा संबंध
कुत्ते का संबंध भगवान भैरव से जुड़ा भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भैरव महाराज का वाहन कुत्ता हैं । इसलिए रविवार, मंगलवार या काल भैरव से जुड़े अवसरों पर कुत्तों को भोजन कराना विशेष फलदायी माना जाता है।
सरल उपाय में छिपा है बड़ा संदेश
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुत्ते को भोजन कराना सिर्फ ग्रह दोष शांति का उपाय नहीं बल्कि जीवों के प्रति दया और सेवा भाव का संदेश भी देता है। रोजाना नियमित रूप से यह छोटा सा कार्य करने से जीवन में संतुलन और मानसिक शांति बनी रहती है।


