Dharm Desk – सावन माह का दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने से भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ हनुमानजी की पूजा का भी विशेष संयोग होगा। धार्मिक मान्यता है कि भौम प्रदोष का व्रत करने और विधि-विधान से पूजा करने से ऋण संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिली है, आरोग्य और सुख की प्राप्ति होती है।

त्रयोदशी तिथि कब से कब तक रहेगी
पंचांग बताते हैं कि त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 26 अगस्त की सुबह 7 बजकर 59 मिनट बजे तक रहेगी। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
शिवजी का अभिषेक इस समय करें
25 अगस्त को प्रदोष काल के समय पूजा के लिए शुभ समय शाम 6 बजकर 51 मिनअ से रात 9 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, फूल और जल अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद माता पार्वती और हनुमानजी की पूजा कर आरती करे।
भौम प्रदोष पर हनुमानजी की पूजा क्यों खास
मंगलवार का दिन होने के कारण इस बार की प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है। मंगलवार का संबंध भगवान हनुमान से माना जाता है। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती के साथ हनुमानजी की पूजा करने का विशेष धार्मिक महत्व बताया जाता है। ऋण और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोग भी श्रद्धा पूर्वक भौम प्रदोष का व्रत कर महादेव और हनुमानजी से प्रार्थना कर सकते है।
इस तरह करें पूजा
सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प ले। दिनभर व्रत की तैयारी करें और और शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग का जल या पंचामृत से अभिषेक करें। आेम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करें। माता पार्वती की पूजा करें। इसके बाद हनुमानजी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है। अंत में शिव परिवार और हनुमानजी की आरती कर प्रसाद वितरित करे।


