Abdul-El-Sayed First Muslim US Senator: यूएस मिडटर्म चुनाव-2026 में डोनाल्ड ट्रंप को करारी हार हुई है। US Midterm Election अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी यानी ‘ग्रैंड ओल्ड पार्टी’ (Grand Old Party) का सूपड़ा साफ हो गया। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों हाउस और सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। ट्रंप ने भी अपनी हार स्वीकार कर ली है। इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें थी। ये चुनाव ट्रंप का भविष्य तय करने वाला था। वहीं कई सीटों पर भी पूरी दुनिया की नजरें थी। इन सीटों में से मिशिगन सीनेट का चुनाव भी था। मिशिगन सीनेट सीट का रिजल्ट भी आ गया है। अमेरिका में ‘अब्दुल’ ने रचा इतिहास रच दिया है। मिस्र मूल के अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन सीनेट (Michigan Senate elections) सीट जीत लिया है। इसी के साथ ही अब्दुल अल-सैयद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। अल-सैयद ने रिपब्लिकन पार्टी के नेता माइक रोजर्स को हराया।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर विरोधी इल्हान उमर (Ilhan Omar) ने भी पांचवीं बार जीत हासिल कर ली है। डोनाल्ड ट्रंप के विरोध के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी की इल्हान उमर ने मिनेसोटा से पांचवीं बार जीत हासिल की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन नेगल को हराया। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने उमर पर लगातार निशाना साधा था। उनकी शादी और अमेरिकी नागरिकता को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

मिस्र मूल के अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन सीनेट का चुनाव जीत लिया है। इसी के साथ ही ‘अब्दुल’ ने इतिहास रचते हुए पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ में तो मुस्लिम प्रतिनिधि चुने जा चुके हैं, लेकिन ऊपरी सदन ‘सीनेट’ में आज तक कोई भी मुस्लिम नेता नहीं पहुंचा था। इस बार के चुनाव में अब्दुल अल-सैयद ने यह मुकाम हासिल कर लिया। न्यूयॉर्क टाइम्स के आंकड़ों के मुताबिक, अब्दुल अल-सैयद को 51.7 फीसदी वोट मिले। वहीं उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे रिपब्लिकन पार्टी के माइक रोजर्स को 46.3 फीसदी वोट मिले हैं। इस तरह से अब्दुल अल सैयद ने माइक को हरा दिया।

अब्दुल प्राइमरी में रच चुका है इतिहास

बता दें कि 42 वर्षीय अल-सैयद एक पब्लिक हेल्थ एडवोकेट हैं, जो लगातार डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर रहे हैं। अगस्त 2026 में हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में अब्दुल अल सैयद ने अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा सीनेट प्राइमरी चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था। उन्होंने प्रतिनिधि हैली स्टीवंस को हराकर डेमोक्रेटिक टिकट हासिल किया था। अल-सैयद कॉर्पोरेट चंदे के खिलाफ रहे हैं और उन्होंने छोटे व्यक्तिगत चंदों के दम पर अपना पूरा चुनावी अभियान चलाया है। अब्दुल अल सैयद ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ (सभी के लिए मुफ्त/सस्ती स्वास्थ्य सेवा) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर सख्त सरकारी नियंत्रण के बड़े समर्थक हैं।

ट्रंप ने अब्दुल को बताया था जिहादी

डोनाल्ड ट्रंप ने मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार डॉ. अब्दुल अल-सैयद के खिलाफ अपनी रैलियों में जिहादी और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े होने का बयान दिया था। ट्रंप ने मिशिगन के पोर्ट ह्यूरॉन और आयोवा में अपनी चुनावी रैलियों के दौरान अब्दुल अल-सैयद पर निशाना साधते हुए उनका नाम लेकर तंज कसा और कहा था कि कोई कहता है उसका नाम अब्दुल है, मेरे लिए वो मोहम्मद है और वो एक कट्टर जिहादी है। ट्रंप ने अब्दुल अल-सैयद पर आरोप लगाया था कि वह और उनका परिवार मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े हैं और अमेरिका में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। ट्रंप ने 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों का जिक्र किया था। ट्रंप ने कहा कि अगर अल-सैयद नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन जीत जाते हैं, तो उन्हें अमेरिकी सीनेट में एंट्री से पहले मेटल डिटेक्टर से सिक्योरिटी की जांच करानी चाहिए।

जानिए कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?

डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद का जन्म31 अक्टूबर 1984 को मिशिगन में हुआ है. वो पेशे से प्रोफेसर हैं।  यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से स्नातक करने के बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट (DPhil) की उपाधि हासिल की थी। इसके बाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री (MD) ली। अल-सैयद महज 30 साल की उम्र में डेट्रॉइट शहर के सबसे युवा स्वास्थ्य निदेशक बने थे। अब्दुल अल सैयाद डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव गुट से आते हैं और दिग्गज नेता बर्नी सैंडर्स के करीबी माने जाते हैं।

ट्रंप की कट्टर विरोधी इल्हान उमर (Ilhan Omar) भी पांचवीं बार जीतीं

डोनाल्ड ट्रंप के विरोध के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी की इल्हान उमर ने मिनेसोटा से पांचवीं बार जीत हासिल की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन नेगल को हराया। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने उमर पर लगातार निशाना साधा था। उनकी शादी और अमेरिकी नागरिकता को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। फिलहाल अमेरिकी एजेंसियां उनके पुराने आव्रजन दस्तावेजों और नागरिकता से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। उमर ने इन आरोपों को गलत बताया है और जांच को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कहा है

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