कारगिल विजय दिवस पर श्रद्धांजलि सभा की अनुमति नहीं मिलने से शुरू हुआ विवाद, पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग पर अड़े कार्यकर्ता

जैसलमेर। राजस्थान के सीमावर्ती शहर जैसलमेर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और स्थानीय पुलिस के बीच शुरू हुआ विवाद अब आंदोलन का रूप ले चुका है। शहर कोतवाली पुलिस पर अभद्र व्यवहार, प्रताड़ना और कानूनी कार्रवाई की धमकी देने का आरोप लगाते हुए एबीवीपी कार्यकर्ता पिछले दो दिनों से कोतवाली थाने के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। धरने के दौरान एसबीके कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र सिंह करड़ा की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला और गरमा गया है।

श्रद्धांजलि सभा की अनुमति को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, कारगिल विजय दिवस के अवसर पर एबीवीपी कार्यकर्ता वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करना चाहते थे। आरोप है कि कार्यक्रम की अनुमति लेने पहुंचे छात्रों को शहर कोतवाली में अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। कार्यकर्ताओं का दावा है कि उन्हें करीब एक घंटे तक थाने में बैठाकर रखा गया और फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी भी दी गई।

एसपी कार्यालय से कोतवाली तक पहुंचा विरोध

पुलिस के रवैये से नाराज एबीवीपी पदाधिकारियों ने पहले पुलिस अधीक्षक कार्यालय का रुख किया। वहां अधिकारी के नहीं मिलने पर वे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां भी पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसके बाद कार्यकर्ता शहर कोतवाली के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शहर कोतवाल सुरजाराम और हेड कांस्टेबल दीपेंद्र सिंह को तत्काल निलंबित करने की है।

धरने के दौरान छात्र नेता की बिगड़ी तबीयत

अनिश्चितकालीन धरने के दौरान तेज धूप और गर्मी के कारण एसबीके कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र सिंह करड़ा की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर पहुंचे चिकित्सकों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर आराम करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। करड़ा ने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होने तक उनका अनशन और धरना जारी रहेगा।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा असंतोष

धरना शुरू हुए दो दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन या पुलिस के किसी वरिष्ठ अधिकारी के प्रदर्शन स्थल पर नहीं पहुंचने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। प्रदर्शनकारी लगातार निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।